महाराणा प्रताप की जयंती की पूर्व संध्या पर संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह आयोजित हुआ

Jun 17 2026

ग्वालियर। महाराणा प्रताप की जयंती पर शहरवासियों ने उनके शौर्य को याद किया। गोला का मंदिर स्थित प्रतिमा स्थल पर शहरवासियों ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए।इस दौरान वक्ताओं ने उनके शौर्य को याद करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। महाराणा प्रताप की जयंती के पूर्व संध्या पर कंपू स्थिति, अशोक सभागार में एक संगोष्ठी और सम्मान समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें समाज के विभिन्न क्षेत्रों से प्रतिष्ठित व्यक्तियों को सम्मानित किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि राजपूत हितकारिणी सभा के अध्यक्ष आध्यात्मिक गुरु संत कृपाल सिंह ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अखिल भारतीय राजपूत फाउंडेशन के अध्यक्ष आशीष प्रताप सिंह राठौड़ ने की। मुख्य वक्ता के रूप में डॉ राखी चौहान उपस्थित रहीं। विशिष्ट अतिथि महेंद्र सिंह तोमर, नरेंद्र सिंह सिकरवार, भानु प्रताप सिंह चौहान, प्रो केपीएस चौहान थे।  
 संगोष्ठी की शुरुआत में कार्यक्रम संयोजक आशीष प्रताप सिंह राठौड़ ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाराणा प्रताप को त्याग और बलिदान का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि सामाजिक एकता, समरसता की स्थापना के लिए महाराणा प्रताप ने अपने जीवन का बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि धार्मिक अनुष्ठान, यज्ञ के माध्यम से सभी को एक सूत्र में बांधकर रखने का प्रयास किया गया है। रामायण में भगवान श्रीराम की निषाद राज गोह के साथ मित्रता, पक्षीराज जटायु का अंतिम संस्कार करना, माता शबरी के झूठे बेर खाना, वनराज सुग्रीव के साथ मित्रता स्थापित करना सामाजिक समरसता का प्रतीक है इसी प्रकार महाराणा प्रताप ने अपनी सेना में भीलों को शामिल किया था। महाराणा प्रताप केवल एक योद्धा नहीं थे बल्कि उन्होंने अपने सामाजिक सामूहिक नेत्रों से समाज में एकता और समानता का संदेश दिया।
इस अवसर पर राजपूत हितकारिणी सभा के अध्यक्ष संत कृपाल सिंह ने कहा कि महाराणा प्रताप एक अमर वीरता के प्रतीक थे, जिन्होंने अपने स्वाभिमान और मातृभूमि के लिए कभी समझौता नहीं किया। उनके अद्य साहस ने मुगलों के खिलाफ एक प्रतीकात्मक प्रतिरोध खड़ा किया। वे एक ऐसे नायक थे, जिन्होंने अपने जीवन का हर पल देश की आज़ादी के लिए समर्पित किया। उनके त्याग और साहस की गूंज आज भी हर दिल में जीवित है, और वे हर भारतीय के लिए प्रेरणा के स्रोत बने हुए हैं। मुख्य वक्ता डॉ राखी चौहान ने महाराणा प्रताप के साहस और उनके द्वारा दिखाए गए मार्ग पर प्रकाश डाला। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि हमें महाराणा प्रताप की विरासत को अपनाते हुए, अपने समाज और देश के लिए समर्पण के साथ काम करना चाहिए। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों को सम्मानित किया गया, और महाराणा प्रताप के आदर्शों को जीवित रखने का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम का संचालन राजकरण सिंह भदौरिया ने किया एवं आभार भूपेंद्र सिंह तोमर ने व्यक्त किया।