अचलेश्वर मंदिर पर हाईकोर्ट का आदेश 6 महीने में कराएं चुनाव, ट्रस्ट निजी जागीर नहीं
Jun 16 2026
ग्वालियर। श्री अचलेश्वर महादेव सार्वजनिक न्यास के प्रबंधन और करोड़ों की संपत्ति के दुरुपयोग को लेकर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति आशीष श्रोती की एकलपीठ ने निचली अदालत (दसवें जिला न्यायाधीश) द्वारा तकनीकी आधार पर ट्रस्ट की जांच रिपोर्ट और संदर्भ को खारिज करने के आदेश को पूरी तरह से शून्य और गैर-कानूनी घोषित करते हुए पलट दिया है।
हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि पब्लिक ट्रस्ट की संपत्ति समाज के कल्याण और धार्मिक कार्यों के लिए होती है, न कि किसी के निजी मुनाफे के लिए। कोर्ट ने जिला प्रशासन और अदालत को न्यास की संपत्तियों की सुरक्षा करने की उनकी कानूनी जिम्मेदारी याद दिलाई। ज्ञातव्य है कि उक्त याचिका मंदिर न्यास के संतोष सिंह राठौड़ ने दायर की थी। न्यास के सदस्य संतोष सिंह राठौड़, हरीबाबू शिवहरे, पूर्व सूचना सचिव महेंद्र भदकारिया, राजीव चड्ढा, घनश्याम गुप्ता, प्रदीप बंसल, महेश सिंह तोमर, अजमेर सिंह रावत, सुरेन्द्र शर्मा, आदित्य शर्मा आदि ने उच्च न्यायालय के आदेश का स्वागत करते हुए कहा है कि न्यायालय ने दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया है। अब अचलेश्वर न्यास के नौ वर्ष से नहीं हुए बहुप्रतीक्षित चुनाव होना तय है। पुरानों को जाना ही होगा और चुनाव की प्रक्रिया के बाद कर्मठ एवं सक्षम नेतृत्व अचलेश्वर मंदिर न्यास की गतिविधियों को द्रुत रूप देगा।
ज्ञातव्य है कि निचली अदालत ने 15 नवंबर 2022 को अपने आदेश में कलेक्टर/पंजीयक द्वारा भेजी गई जांच रिपोर्ट को तकनीकी कमियों का हवाला देकर खारिज कर दिया था और जिस कार्यकारिणी का कार्यकाल साल 2019 में ही खत्म हो चुका था, उसे दोबारा काम करने की इजाजत दे दी थी। हाईकोर्ट ने इस पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि 'जब कार्यकारिणी का चुनाव आखिरी बार 2017 में हुआ था और उसका दो साल का कार्यकाल 2019 में ही समाप्त हो गया, तो बिना किसी वैध चुनाव के वह कार्यकारिणी अवैध रूप से काम कर रही थी। निचली अदालत का उन्हें दोबारा पद पर बिठाने का फैसला पूरी तरह से गलत था।Ó इस आदेश के साथ ही हाईकोर्ट ने पुरानी कार्यकारिणी को काम करने की दी गई अनुमति को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है।
राठौड़ की याचिका से खुला था राज
सामाजिक कार्यकर्ता संतोष सिंह राठौर ने मंदिर ट्रस्ट की संपत्तियों और फंड में भारी हेरफेर और कुप्रबंधन को देखते हुए पंजीयक के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी। हाईकोर्ट के निर्देश पर जब संयुक्त निदेशक (कोष एवं लेखा) ने मंदिर के खातों का ऑडिट किया, तो वित्तीय अनियमितताओं और फंड का दुरुपयोग सामने आया।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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