घर से भागे 5भाई-बहन, ग्वालियर पुलिस ने हाईवे से रेस्क्यू कर चप्पल पहनाईं-खाना खिलाया

Jun 09 2026

ग्वालियर। शराबी पिता की रोजाना मारपीट और प्रताडऩा से तंग आकर पांच बच्चे मंगलवार सुबह घर छोडक़र भाग निकले। बच्चे पैदल चलते-चलते आरोन से घाटीगांव के पास आगरा-मुंबई नेशनल हाईवे तक पहुंच गए। तपती सडक़ पर नंगे पैर और बदहवास हालत में भटक रहे बच्चों को पुलिस ने रेस्क्यू कर लिया। उन्हें चप्पलें पहनाईं और खाना भी खिलाया और थाने लेकर पहुंची। 
थाने में जब महिला पुलिसकर्मियों ने बच्चों से प्यार से बात की, तो उनका दर्द छलक पड़ा। बच्चों ने रोते हुए बताया कि उनकी मां का देहांत पांच साल पहले हो चुका है। उनका पिता रोज शराब पीकर आता है और उन्हें जानवरों की तरह पीटता है। जान बचाने के लिए उनके पास भागने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था। इन पांच बच्चों में सबसे बड़ा बेटा केवल 12 साल का है, जबकि उसकी उंगली थामकर चल रही सबसे छोटी बहन महज 6 साल की है।
बच्चों की किस्मत अच्छी थी कि उसी समय हाईवे से गुजर रही घाटीगांव थाना प्रभारी पूरन शर्मा व पुलिस मोबाइल टीम की नजर उन पर पड़ गई। हाईवे के किनारे छोटे-छोटे बच्चों को इस तरह नंगे पैर और बदहवास हालत में घूमते देख पुलिस अधिकारी ने तुरंत गाड़ी रोकी, बच्चों को दुलार कर रोका और घाटीगांव थाने लेकर आई। 
भूखे-प्यासे बच्चों को सबसे पहले भरपेट खाना खिलाया गया। इसके बाद बच्चों के पैरों में छाले और दुर्दशा देखकर घाटीगांव थाना प्रभारी पूरन शर्मा ने तुरंत पुलिस मोबाइल में बच्चों को बाजार भेजा और पुलिस जवानों ने उन को नए जूते, चप्पल दिलवाए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए घाटीगांव पुलिस ने तुरंत बच्चों के परिवार और उनकी मां के बारे में जानकारी जुटाई। पता लगा कि बच्चों की मां का देहांत हो चुका है। बच्चों के दादा-दादी से संपर्क किया है। उनको बुलाया जा रहा है। जब तक बच्चों को घाटीगांव में उनके चाचा के पास रखा गया है। 
इस पर घाटीगांव थाना प्रभारी पूरन शर्मा का कहना कि जब तक बच्चों के परिजन घाटीगांव नहीं आ जाते हैं, तब तक उन्हें किसी और के हवाले नहीं किया जाएगा। दादी के आने और कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही बच्चों को उन्हें सौंपा जाएगा। बच्चे सुबह-सुबह घर से निकल आए थे। इस दौरान यदि पुलिस की नजर नहीं पड़ती तो बच्चों के साथ कोई भी गंभीर घटना हो सकती थी।