अभिलेखागार और क्षेत्रीय अध्ययन के बिना संभव नहीं प्रामाणिक इतिहास लेखन: डॉ. शांतिदेव सिसोदिया
Jun 07 2026
ग्वालियर। जीवाजी विश्वविद्यालय, केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश तथा ठाकुर रामसिंह इतिहास शोध संस्थान, नेरी हमीरपुर के बीच हुए एमओयू के तहत आयोजित त्रिदिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में सामाजिक विज्ञान अनुसंधान की नई संभावनाओं और शोध पद्धतियों पर विस्तार से मंथन किया गया। सामाजिक विज्ञान में अनुसंधान पद्धति : सिद्धांत और व्यवहार विषय पर आयोजित इस कार्यशाला में देशभर से आए विद्वानों, शोधार्थियों और शिक्षकों ने सहभागिता की। कार्यक्रम के मुख्य सत्र में जीवाजी विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व अध्ययनशाला के विभागाध्यक्ष डॉ. शांतिदेव सिसोदिया ने मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि इतिहास लेखन के लिए अभिलेखीय स्रोत, क्षेत्रीय सर्वेक्षण और प्रत्यक्ष अध्ययन सबसे विश्वसनीय आधार हैं। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शोध के लिए शोधार्थियों को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रहकर मूल स्रोतों के वैज्ञानिक विश्लेषण और फील्ड स्टडी पर विशेष ध्यान देना चाहिए। डॉ. सिसोदिया ने अपने व्याख्यान में सामाजिक विज्ञान अनुसंधान की नवीन पद्धतियों, व्यावहारिक पक्षों तथा बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। सत्र के दौरान शोधार्थियों ने उनसे शोध प्रक्रिया, स्रोत-संग्रहण और शोध लेखन से जुड़े विभिन्न प्रश्न भी पूछे, जिनका उन्होंने विस्तारपूर्वक समाधान किया।
कार्यशाला में केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश के इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. जगदीश प्रसाद तथा डॉ. राघवेंद्र यादव ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने सामाजिक विज्ञान एवं इतिहास विषयक अनुसंधान में संस्थानों के बीच सहयोग को और मजबूत करने तथा युवा शोधार्थियों के लिए अधिक अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यशाला के अंतर्गत प्रतिभागियों को हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत से परिचित कराने हेतु विभिन्न मठों और ऐतिहासिक स्थलों का शैक्षणिक भ्रमण भी कराया गया। इस दौरान इतिहास, संस्कृति और विरासत संरक्षण से जुड़े विषयों पर सार्थक चर्चा हुई।
इस अवसर पर केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश के पूर्व कुलपति कुलदीप अग्निहोत्री, निदेशक ठाकुर राम सिंह इतिहास शोध संस्थान नेरी हिमाचल प्रदेश डॉ. चेतराम गर्ग, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला डॉ. अंकुश भारद्वाज, पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय बठिंडा डॉ. अश्विनी भारद्वाज, सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी डॉ. राकेश कुमार शर्मा, जीवाजी विश्वविद्यालय के शोधार्थी राहुल बरैया, प्रिया सुमन तथा विभागीय स्टाफ सदस्य चांदनी नरवरिया सहित अनेक प्रतिभागी उपस्थित रहे।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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