संविदाकर्मियों की हड़ताल: कर्मचारियों ने सद्बुद्धि यज्ञ किया

Jun 07 2026

ग्वालियर। संविदाकर्मियों की हड़ताल का रविवार को छठवां दिन था और इस बीच जानकारी यह सामने आई है कि कुछ नर्सिंग ऑफिसर ने इससे किनारा कर लिया है और वह अपनी ड्यूटी कर रही हैं। ड्यूटी करने के पीछे कारण बताया गया है कि यह सभी नर्सिंग ऑफिसर अस्पतालों के प्रसूतिगृह में पदस्थ हैं और इनसे वहां का मोह छूट नहीं पा रहा। दूसरी तरफ हड़ताल पर बैठे संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी सरकार को सद्बुद्धि मिले इसके लिए यज्ञ का आयोजन किया। 
संविदा स्वास्थ्य कर्मी २ जून से विभिन्न मांगों को लेकर अनिश्चतकालीन हड़ताल पर डटे हुए हैं। सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से बेपटरी हो चुकी हैं। वहीं कुछ अस्पतालों में नर्सिंग ऑफिसर बराबर ड्यूटी कर रही हैं। ड्यूटी के पीछे भावना सेवा या कत्र्तव्य की नहीं बल्कि उस चढ़ावे की है जो प्रसूतिगृह में बच्चे के जन्म के बाद मिलता है। इसलिए इन नर्सिंग ऑफिसर का मोह नहीं छूट पा रहा है। अगर हड़ताल में शामिल हुए तो एक तरफ भीषण गर्मी में तपना पड़ेगा तो दूसरी तरफ रोज का हजारों रुपए का घाटा होगा। जानकारी के अनुसार बरई में २, माधौगंज में २ तथा मोहना में ३ नर्सिंग ऑफिसर जो कि लेबर रूम में पदस्थ हैं वह हड़ताल में शामिल नहीं है।
संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने रविवार को शासन-प्रशासन को सद्बुद्धि मिले इसके लिए यज्ञ का आयोजन किया। यज्ञ से निकलने वाला धुआं सरकार की तंद्रा भंग कर पाएगा या नहीं यह समय के गर्त में है, लेकिन हड़ताली कर्मियों ने तो फिलहाल पूरी ताकत झौंक दी है।
संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष धर्मवीर शुक्ला ने कहा यह बात सही है कि कुछ नर्सिंग ऑफिसर हड़ताल में शामिल नहीं हैं, यह उनकी मर्जी व विवेक पर निर्भर करता है। जो शामिल नहीं उनका कुछ नहीं कर सकते, हमारी लड़ाई तो सबके लिए है और जब तक डिमांड पूरी नहीं होती, हड़ताल जारी रहेगी। 
जनप्रतिनिधियों ने नहीं ली सुध
ड़ताली कर्मचारियों से ६ दिन बीत जाने के बाद भी शासन-प्रशासन का कोई प्रतिनिधि मिलने तक नहीं पहुंचा है। शासन की तरफ से इस बात का संदेश दिया जा रहा है कि हड़ताल से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ा है। मंत्री, विधायक या कोई भी अन्य जनप्रतिनिधि अभी तक किसी तरह की चर्चा के लिए आगे नहीं आया है।
संदेश यह दिया जा रहा है कि व्यवस्थाएं सुचारू रूप से चल रही हैं। हालांकि यह अलग बात है कि मरीजों के ऑपरेशन टालने पड़ रहे हैं, अनट्रेंड नर्सिंग स्टाफ इलाज कर रहा है, गैर जरूरी मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है और स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अफसर माथा पकडक़र यह सोच रहे हैं कि व्यवस्थाएं बनाई कैसे जाएं।