संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी, स्वास्थ्य सेवाएं चरमराई
Jun 03 2026
ग्वालियर। मध्य प्रदेश संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के निर्देश पर सम्पूर्ण प्रदेश में संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की कालीन अनिश्चितकालीन हड़ताल बुधवार को भी जारी रही। बुधवार को संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ द्वारा प्याऊ लगाकर लोगों को पानी पिलाया गया और अपनी मांगो को लेकर अपनी बात कही। संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से संपूर्ण ग्वालियर जिले में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं। संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष धर्मवीर शुक्ला ने बताया कि वर्ष 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की उपस्थिति में संविदा कर्मचारियों की महापंचायत आयोजित की गयी जिसमें संविदा कर्मचारिायों के लिये कई कल्याणकारी घोषणायें की गयी थीं। जिसके बाद वर्ष 2023 में सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा सभी संविदा कर्मचारियों के संविदा नीति जारी की गयी किंतु आज दिनांक तक संविदा नीति की पालन पूरी तरह से नहीं हो पाया है। इसके साथ ही संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की माँगो पर एक वर्ष पूर्व सहमति हुई परंतु एक वर्ष होने पश्चात भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया जिससे प्रदेश के समस्त कर्मचारियों मे आक्रोश व्याप्त है। संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ मप्र की कार्य समिति के निर्णय अनुसार प्रदेश के 32 हजार कर्मचारी के द्वारा चरणबद्ध आंदोलन पर जाने का निर्णय लिया गया।
एक दिन में वापस आएं, नहीं तो सेवा समाप्त
अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे संविदाकर्मियों को डराने-धमकाने का काम सीएमएचओ डॉ. सचिन श्रीवास्तव ने शुरु कर दिया है। विगत देर रात उन्होंने एक आदेश जारी किया जिसमें नियमों का हवाला देते हुए हड़ताल पर गए संविदाकर्मियों को काम पर वापस आने का एक दिन का समय दिया है। एक दिन में वापस न आने पर सेवाएं समाप्त करने की चेतावनी दी है।
सीएमएचओ डॉ. सचिन श्रीवास्तव इस बार भी पूरी तरह से लाचार और अक्षम साबित हुए, क्योंकि संविदाकर्मी 25 मई से आंदोलनरत हो गए थे और उन्होंने 2 जून से हड़ताल पर जाने की घोषणा की थी। इसके बाद भी सीएमएचओ डॉ. श्रीवास्तव न उनसे बात कर सके और न स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर कोई व्यवस्था बना सके। इससे पूरे जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था बिगड़ गई।
हम न डरेंगे, न उठेंगे
सीएमएचओ के चेतावनी पत्र पर संविदा कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष धर्मवीर शुक्ला ने कहा कि हम न तो डरेंगे और न ही धरने से उठेंगे। जब तक हमारी मांगें नहीं मानी जाती, तब तक अनिश्चिकालीन हड़ताल जारी रहेगी। उनका कहना था कि संविदा कर्मी जब पूरी व्यवस्थाएं संभालते हैं तो उन्हें नियमितों जैसा लाभ देने में आना-कानी क्यों की जा रही है। जब काम समान रूप से कर रहे हैं तो सुविधाएं भी समान ही मिलनी चाहिए।
न लगे टीके, न हो पाईं जांच
संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल का असर यह हुआ कि अस्पतालों में सारे काम लडख़ड़ा गए। बच्चों का टीकाकरण नहीं हो सका, गर्भवती महिलाओं की जांच नहीं हो पाई, संजीवनी और आयुष्मान क्लीनिकों में सन्नाटा पसरा रहा, ऑपरेशन टालने पड़े, टीबी प्रोग्राम बंद हो गए और मरीजों को दवाएं नहीं मिलीं। ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोग मर्ज का इलाज कराने के लिए इधर से उधर भटकते देखे गए। उनमें आक्रोश भी नजर आया। सबसे गंभीर बात मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम को लेकर रही। यह प्रदेश सरकार की अति महत्वाकांक्षी योजना है, जिस पर हड़ताल का असर साफ नजर आया। जांच कराने पहुंची महिलाओं एवं छोटे बच्चों को वापस लौटना पड़ा।
संविदा कर्मचारियों के प्रमुख मांगे निम्नानुसार है
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के सभी संविदा कर्मचारियों को मुख्यमंत्री द्वारा 30 जनवरी 2026 को दशहरा मैदान टीटी नगर में अभिनंदन कार्यक्रम में की गई घोषणा अनुसार नियमितिकरण का लाभ दिया जाये। सामान्य प्रशासन 2023 की नीति अनुसार एनपीएस एवं स्वास्थ्य बीमा का लाभ प्रदान किया जाये। अन्य राज्यो की भांति 40 प्रतिशत वार्षिक वेतनवृद्धि दी जाये। नियमित कर्मचारियों की भांति मंहगाई भत्ता प्रदान किया जाये। सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी के वेतन में पीबीआई समायोजित किया जाये। शासन द्वारा समकक्षता (वितन विसंगति) का निर्धारण गलत किया गया है। जिस पर पुन: विचार कर संशोधित किया जाये। संविदा कर्मचारियों को नियमित की भांति अवकाश प्रदान किये जाये। शासन की मंशा के अनुसार समान कार्य एवं समान वेतन एवं सुविधायें न मिलने तक सार्थक एप बंद किया जाये।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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