दो जून की रोटी के लिए संविदा कर्मचारी दो जून से हड़ताल पर गए
Jun 02 2026
ग्वालियर। संविदा स्वास्थ्य कर्मियों ने मंगलवार को पड़ाव पुल के नीचे स्थित मंशापूर्ण हनुमान जी के चरणों में ज्ञापन देकर अनिश्चितकालीन हड़ताल का शंखनाद कर दिया। सरकार की वादा खिलाफी और 8 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदेश के 32 हजार संविदा कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से स्वास्थ्य सेवाएं पहले ही दिन चरमरा गईं। संजीवनी क्लीनिक में इलाज नहीं मिला तो तमाम सरकारी अस्पतालों में गैर जरूरी मरीजों को भर्ती नहीं किया गया। ऑपरेशन जो बहुत जरूरी थे, वही किए गए। बता दें कि सरकार द्वारा मरीजों के हितार्थ जो योजनाएं व अभियान चलाए जा रहे हैं वह पूरी तरह से संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी ही संभालते हैं।
संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी सरकार की वादा खिलाफी से खफा हैं। जिलाध्यक्ष धर्मवीर शुक्ला ने बताया कि 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में संविदा कर्मचारियों की महापंचायत आयोजित की गई थी। जिसमें संविदा कर्मचारियों के लिए कल्याणकारी घोषणाएं की गई थीं। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा सभी संविदा कर्मचारियों के लिए संविदा नीति जारी की गई, लेकिन आज तक नीति का पालन पूरी तरह से नहीं हो पाया। इसके साथ ही संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की मांगों पर एक वर्ष पूर्व सहमति हुई, परंतु अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
संविदा स्वास्थ्य कर्मियों के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने से संजीवनी क्लीनिक की सेवाएं,आयुष्मान आरोग्य केंद्र, टीबी प्रोग्राम, एसएनसीयू की व्यवस्था, बच्चों का टीकाकरण, एनआरसी आदि की व्यवस्था प्रभावित हुई।
अस्पतालों में मैसेज गैर जरूरी मरीज नहीं करें भर्ती
संविदा स्वास्थ्य कर्मियों के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के संदेश से सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाएं चरमराने लगी है। सिविल अस्पताल हजीरा के अधीक्षक डॉ. प्रशांत नायक ने निर्देश जारी कर दिए हैं कि संविदा साथी हड़ताल पर है, अत: सिर्फ अति आवश्यक मरीजों को ही भर्ती किया जाए। इमरजेंसी ऑपरेशन किए जाएं। ऐसे ही तमाम संदेश और निर्देश सिविल अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में जारी किए गए हैं।
यह हैं मांग
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के सभी संविदा कर्मचारियों को नियमितिकरण का लाभ दिया जाए। सामान्य प्रशासन 2023 की नीति अनुसार एनपीएस एवं स्वास्थ्य बीमा का लाभ दिया जाए। अन्य राज्यों की भांति 40 प्रतिशत वार्षिक वेतनवृद्धि दी जाए। नियमित कर्मचारियों की भांति महंगाई भत्ता प्रदान किया जाए। सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी के वेतन में पीबीआई समायोजित किया जाए। शासन द्वारा समकक्षता (वेतन विसंगति) का निर्धारण गलत किया गया है। जिस पर पुन: विचार कर संशोधित किया जाए। संविदा कर्मचारियों को नियमित की भांति अवकाश प्रदान किए जाएं। शासन की मंशा के अनुसार समान कार्य एवं समान वेतन एवं सुविधायें न मिलने तक सार्थक एप बंद किया जाएं।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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