सावरकर का जीवन देशभक्ति, आत्मबल और कर्तव्यनिष्ठा का प्रेरक उदाहरण:आशीष अग्रवाल

May 28 2026

ग्वालियर। स्वातंर्त्यवीर विनायक दामोदर सावरकर की जयंती पर गुरुवार को पं. दीनदयाल उपाध्याय स्वाध्याय मंच ग्वालियर द्वारा आयोजित पुष्पांजलि कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष उषा अग्रवाल, साडा के उपाध्यक्ष हरीश मेवाफरोश, वरिष्ठ व्यवसायी एवं समाजसेवी हरिदास अग्रवाल सहित जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ नेताओं एवं गणमान्य नागरिकों ने सावरकर को श्रद्धापूर्वक पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने सावरकर के राष्ट्रवादी चिंतन, अद्वितीय त्याग, तपस्या एवं राष्ट्र के प्रति उनके अटूट समर्पण को स्मरण करते हुए कहा कि उनका जीवन देशभक्ति, आत्मबल और कर्तव्यनिष्ठा का प्रेरक उदाहरण है। सावरकर के विचार आज भी समाज के प्रत्येक वर्ग, विशेषकर युवाओं को राष्ट्रसेवा के लिए निरंतर प्रेरित करते हैं। 
भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष उषा अग्रवाल ने कहा कि आज हम सभी एक ऐसे महान राष्ट्रनायक, विचारक और क्रांतिकारी व्यक्तित्व को स्मरण करने के लिए एकत्रित हुए हैं, जिनका सम्पूर्ण जीवन राष्ट्रभक्ति, त्याग, साहस और अदम्य आत्मबल का प्रतीक हैं, स्वातंर्त्यवीर विनायक दामोदर सावरकर। सावरकर केवल एक स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं थे, बल्कि वे एक दूरदर्शी चिंतक, प्रखर राष्ट्रवादी एवं सामाजिक सुधारक भी थे। उन्होंने अपने जीवन का प्रत्येक क्षण भारत माता की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। कालापानी की कठोर यातनाओं के बीच भी उनका राष्ट्रभाव अडिग रहा तथा उन्होंने अपने विचारों को कर्म के माध्यम से राष्ट्रसेवा में परिवर्तित किया।  
साडा के उपाध्यक्ष हरीश मेवाफरोश ने कहा कि सावरकर ने समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने का भी प्रयास किया। वे सामाजिक समरसता, एकता और आत्मनिर्भरता के प्रबल समर्थक थे। हरिदास अग्रवाल ने दीनदयाल स्वाध्याय मंच के कार्यों की सराहना करते हुए बताया कि यह मंच विगत कई दशकों से राष्ट्रभक्ति की भावना को सुदृढ़ करने एवं युवाओं को अमर शहीदों के त्याग, तपस्या और बलिदान से प्रेरित करने का उत्कृष्ट कार्य कर रहा है।
इस अवसर पर अशोक बांदिल, पार्षद संजय सिंघल, अमित बंसल, प्रमोद गड़कर, संजय चुघ, पारस बरैया, अशोक साहू, दीपक जैन, धनेश जैन, रामकुमार सोनी, दिनेश कुमार वर्मा, प्रवीण दुबे, सुधांशु भारद्वाज, मोनू सोनी, निर्मल कोठारी एवं गिर्राज सोमानी आदि उपस्थित रहे।