दीक्षा मात्र से होता है महा पात को का नाश:विजय महाराज
May 28 2026
ग्वालियर। पुरुषोत्तम मास की पद्मिनी एकादशी पर दीनदयाल नगर में परमार कुटीर में आयोजित सत्संग पाठ में विजय महाराज ने बताया कि समर्थ महापुरुष की दीक्षा मात्र से महापात को का नाश हो जाता है। बशर्ते कोई जन्मो के पुण्य से ब्रहमनिष्ठ सदगुरू मिल जाए, उनमें दृष्टि मात्र से परम कल्याण का सामर्थ्य होता है। दीक्षा कई प्रकार से प्रदान की जाती है। जिसमें शाम्भवी दीक्षा, स्पर्श दीक्षा विशेष मानते ह,ै जिसमें चैतन्य वैदिक मंत्र सद्गुरु देकर हंसते खेलते जीव का उद्धार कर देते हैं। परात्परब्रह्म को उपलब्ध महापुरुष अहर्निश ईश्वर से तादात्म्य स्थापित कर ईश्वर मय हो जाते है उनकी सारे व्यवहार विलक्षण हो ते है उन पर कोई बंधन नहीं होता वे अपनी ईश्वरीय सत्ता से तीनों लोक में समान भाव से गति करते रहते और उन पर कोई संसारी नियम लागू नहीं होता। हम अपनी अल्प बुद्धि से नहीं पहचान पाते।
समापन पर आरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया। इस अवसर पर भगवानदास, बीपीएस सेंगर, बलबीर सिंह परमार, मंगलसिंह तोमर, रामबिहारी नामदेव, अरविंद मिश्रा, हरीसिंह गुर्जर, सीबी शर्मा, रामू रामानी, रंजीत कुमार, राजू लक्षकार, आशीष, अयानश परमार, रमेश सिंह कुशवाह, सलोनी, लता भदौरिया, गुड्डी सिकरवार, शंकुतला चौहान, कुसुम चंदेल, पुष्पा पाठक, एड माला मिश्रा, सुमन सिंह, कृष्णा, नम्रता, शायला परमार इत्यादि उपस्थित रहे।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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