तपते भविष्य पर तकनीक का पहरा: एक नैतिक दृष्टिकोण
May 27 2026
ग्वालियर। मई की इस भीषण गर्मी में, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा ब्लॉक स्तर पर पूर्वानुमान लगाने वाले नए एआई मॉडल को सक्रिय करना मात्र एक वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं, बल्कि समाज के प्रति हमारी 'नैतिक चेतनाÓ और 'मानवीय उत्तरदायित्वÓ का एक नया अध्याय है। नीतिशास्त्र के सिद्धांत अनुसार, जब तकनीक हर 15 मिनट में सटीक जानकारी देकर समाज के अंतिम पायदान पर खड़े किसान और मजदूर के 'जीवन के अधिकारÓ की रक्षा करती है, तो यह धरातल पर 'वितरणात्मक न्यायÓ को स्थापित करती है।
विज्ञान का यह स्वरूप राजनीति और मुनाफे से परे 'लोक कल्याणÓ, डेटा की 'सत्यनिष्ठाÓ और बिना किसी भेदभाव के 'समतावादीÓ सूचना तंत्र को जन्म देता है। वास्तव में, जब हम आधुनिक एल्गोरिदम के जरिए प्रकृति की चाल को भांपकर बेआवाज जिंदगियां बचाते हैं, तब हम तकनीक को 'करुणाÓ का माध्यम बनाकर एक अधिक 'सहानुभूतिपूर्णÓ और 'न्यायसंगतÓ समाज का निर्माण कर रहे होते हैं।
प्रिया शर्मा (स्वतंत्र लेखिका, ग्वालियर)
संपादक
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