अखिल भारतीय साहित्य परिषद का साहित्यिक संवाद एवं व्याख्यान सत्र संपन्न

May 26 2026

ग्वालियर। अखिल भारतीय साहित्य परिषद द्वारा मध्य भारतीय हिन्दी साहित्य सभा के तत्वावधान में ‘साहित्यिक संवाद एवं व्याख्यान सत्र’ का शुभारंभ मां सरस्वती की वंदना के साथ हुआ। कार्यक्रम में डॉ करुणा सक्सेना ने मुख्य वक्ता डॉ. मीनाक्षी मीनल का अंगवस्त्र एवं श्रीफल भेंट कर स्वागत किया। इसके उपरांत डॉ. मीनाक्षी मीनल ने ‘बिहार साहित्य एवं लोक साहित्य परंपरा’ विषय पर अपने विचार व्यक्त किए।  उन्होंने कहा कि, बिहार की छठ पूजा हमें यह सीख देती है कि जब हम डूबते हुए सूरज को प्रणाम करते हैं, तभी उगते हुए सूरज का महत्व समझ पाते हैं। इसी प्रकार यदि हम अपनी पुरानी पीढ़ी का सम्मान करेंगे और उनके सानिध्य में रहेंगे, तभी आने वाली पीढ़ी को सही संस्कार दे पाएंगे।
कार्यक्रम में श्रीधर पराडक़र ने कहा कि जब मनुष्य सही कृत्य करना छोड़ देता है, तब संस्कार और संस्कृति विकृत होने लगते हैं। सही समय पर सही कृत्य करना ही हमारी संस्कृति और लोक परंपरा का मूल आधार है। उन्होंने कहा कि लोक परंपराएं केवल किताबों में नहीं होतीं, बल्कि वे कहानियों, रीति-रिवाजों और पीढ़ी-दर-पीढ़ी मिलने वाले संस्कारों के माध्यम से जीवित रहती हैं। कार्यक्रम के अंत में मध्य भारतीय हिन्दी साहित्य सभा के अध्यक्ष डॉ. कुमार संजीव ने सभी अतिथियों एवं उपस्थित साहित्य प्रेमियों का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर राजकिशोर बाजपेई, दिलीप मिश्रा, विजयकृष्ण योगी, दिनेश पाठक, उपेन्द्र कस्तुरे, राम चरण रुचिर, डॉ सुखदेव माखीजा, शिवम सिंह सिसोदिया, अनुभवी शर्मा, अंजली चौरसिया, विकास बघेल, हेमंत कुमार, गौरव बघेल, प्रयांशु आदि उपस्थित रहे।