तीर्थ स्नान जैसा फल मिलता है भागवतकथा से:संत रामप्रसाद

May 02 2026

ग्वालियर। जहां भागवत कथा होती है वहां समस्त तीर्थों का, समस्त नदियों का, समस्त धर्म क्षेत्रों का आगमन होता है। जब आप तीर्थ करने जाते हो तो एक तीर्थ का पुण्य प्राप्त करते हैं परंतु जब आप भागवत कथा श्रवण करते हैं तो आपको सारे तीर्थों के स्नान एवं दर्शन करने का पुण्य प्राप्त हो जाता है। उक्त विचार संत एवं वक्ता रामप्रसाद महाराज ने ज्येष्ठ मास में लक्ष्मीगंज स्थित रामद्वारा में शनिवार से शुरू हुई श्रीमद्भागवत कथा के पहले दिन भागवत कथा के महात्यम पर प्रकाश डालते हुए व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि यदि किसी कारणवश आप तीर्थयात्रा पर न जा सकें तो पास में चलरही किसी भी श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कर तीर्थ यात्राफल प्राप्त कर सकते हैं। सप्ताह ज्ञान श्रवण का अवसर मनुष्य को बड़े पुण्य से प्राप्त होता है एवं इसके श्रवण मात्र से व्यक्ति की सभी जरूरतें परमात्मा पूर्ण करते हैं।
संतश्री ने आगे कहा कि भगवान की कृपा से भगवान की कथा का अवसर मिलता है, मुख्य यजमान तो निमित्त मात्र होते हैं जबकि सार्थक यजमान तो परमात्मा प्रेमी श्रोता होते हैं,जिनकी सहभागिता से कथा संपन्न होती है। जिसके श्रवण से थकान उतर जाए वही कथा है, प्रभू कथा श्रवण से जन्म जन्मांतर की थकान उतर जाती है। विपरीत परिस्थितियों में भी हम आनंदित रह सकते हैं यही श्रीमद्भागवत हमको सिखाती है।
 रोकडिय़ा सरकार से गाजे बाजे के साथ निकली शोभायात्रा
कथा से पूर्व भव्य शोभा यात्रा रोकडिय़ा सरकार मंदिर से शुरू होकर गाजे बाजे के साथ प्रमुख मार्गों से होती हुई कथा स्थल रामद्वारा पहुंची जिसमें सैकड़ों महिलाएं पीले वस्त्र पहनकर सिर पर कलश धारण करकर चल रही थीं, श्रद्धालू लोग नाचते गाते चल रहे थे। विंटेज कार में महाराजजी अपने शिष्य संत ज्ञानीरामजी के साथ सवार थे। मुख्य यजमान इंद्रा राकेश मंगल श्रीमद्भागवत पोथी सिर पर धारण कर चल रहे थे व श्रद्धालु डीजे व ढोल पर नृत्य कर रहे थे। जगह जगह पर अनेक भक्तों द्वारा श्रीमद्भागवत पोथी का पूजन अर्चन किया गया।