123 बच्चों ने सीखा सीपीआर देना, अब खुद बनेंगे लाइफसेवर
May 01 2026
ग्वालियर। स्कूली बच्चों को आपात स्थिति में जीवन बचाने के कौशल से लैस करने के उद्देश्य से आईएपी सीपीआर ट्रेनिंग सेंटर, ग्वालियर शाखा द्वारा स्कूल के बच्चों को ‘संजीवनी सीपीआर कार्यक्रम’ के तहत प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें 123 किशोर विद्यार्थियों को सफलतापूर्वक सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) का प्रशिक्षण दिया गया, जबकि 30 शिक्षकों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई।
कार्यक्रम राष्ट्रीय कन्वीनर डॉ. लोकेश तिवारी और डॉ. गिरीश भट्ट के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। उन्होंने बताया कि यदि किशोर अवस्था में ही बच्चे इस तकनीक को सीख लें, तो वे समाज में इस अभियान के प्रभावी ‘रिसोर्स पर्सन’ बन सकते हैं। कार्यशाला की खास बात यह रही कि प्रशिक्षण के बाद बच्चों ने स्वयं शिक्षकों को सीपीआर सिखाया, जो कार्यक्रम की सफलता का अहम पहलू रहा। इस आयोजन में डॉ. प्रवीण मित्तल और डॉ. विश्वकाश जैन का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम विद्यालय प्रबंधन परमानंद त्यागी और प्रीति त्यागी के संरक्षण में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
स्टेट संयोजक एवं नेशनल इंस्ट्रक्टर डॉ. रश्मि गुप्ता ने कहा कि आकस्मिक कार्डियक अरेस्ट कभी भी और किसी को भी हो सकता है। ऐसे में किशोरों को सीपीआर का प्रशिक्षण देना बेहद जरूरी है, ताकि वे समय रहते अपने आसपास के लोगों की मदद कर सकें। उन्होंने यह भी बताया कि हाल के वर्षों में स्कूलों में कार्डियक अरेस्ट के मामलों में वृद्धि देखी गई है।
तीन मिनट के भीतर चेस्ट कम्प्रेशन करना जरूरी
वरिष्ठ इंस्ट्रक्टर डॉ. प्रकाश वीर आर्य ने बताया कि यदि कार्डियक अरेस्ट के तीन मिनट के भीतर चेस्ट कम्प्रेशन शुरू नहीं किया जाए, तो मरीज के बचने की संभावना काफी कम हो जाती है। इसलिए ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस जीवनरक्षक तकनीक का प्रशिक्षण मिलना चाहिए।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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