सनातन की पहचान आचरण से होनी चाहिए: पवैया
Apr 28 2026
ग्वालियर। सनातन केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि हमारे जीवन और आचरण में भी झलकना चाहिए। माथे पर तिलक और हाथ में सुरक्षा सूत्र जैसे प्रतीक हमारी पहचान को दर्शाते हैं। जैसे किसी सौभाग्यवती स्त्री के माथे का सिंदूर उसके वैवाहिक जीवन का संकेत देता है, वैसे ही तिलक हमारी सांस्कृतिक पहचान को प्रकट करता है। यह बताता है कि हम सनातनी हैं। यह बात मुख्य अतिथि राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया ने सनातन धर्म मंदिर के स्थापना दिवस (शताब्दी वर्ष) और चक्रधर सम्मान समारोह में धर्म सभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। इस मौके पर करह धाम मुरैना के दीनबंधु दास महाराज को चक्रधर सम्मान से अलंकृत किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मण्डल अध्यक्ष विजय गोयल ने की।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि ने समाज से आह्वान किया कि लोग बिना संकोच अपनी परंपराओं का पालन करें और गर्व के साथ अपनी पहचान को प्रदर्शित करें। उन्होंने कहा कि पहले संतों के माध्यम से धर्म और संस्कार गांव-गांव तक पहुंचते थे, जिससे समाज का नैतिक आधार मजबूत होता था। आज भी संत समाज के लिए प्रेरणा और संस्कारों की पाठशाला हैं। इसीलिए दीनबंधु दास महाराज संत ही नहीं हमारे लिए संस्कारों की पाठशाला हैं। श्री पवैया ने कहा कि आज समाज में संतों के सम्मान की बहुत आवश्यकता है।
इसलिए संतों का सम्मान करना और उनकी बात मानना हमारी नैतिक जिममेदारी है। कार्यक्रम का संचालन राजेश बंसल और आभार वसंत अग्रवाल ने व्यक्त किया। इस मौके पर प्रधानमंत्री रमेशचंद गोयल, धर्म मंत्री रविंद्र सिंघल, कृष्ण कुमार गोयल, प्रदीप बंसल, हरिशंकर सिंघल और रवि गुप्ता सहित कार्यकारिणी सदस्य उपस्थित रहे।
संपादक
Rajesh Jaiswal
9425401405
rajeshgwl9@gmail.com
MP Info News
Invalid RSS feed URL.
ब्रेकिंग न्यूज़
विज़िटर संख्या
अन्य ख़बरें
-
-
-
*हेमू कालानी जन्मोत्सव मिष्ठान वितरण कर बनाया* *
—03/23/2019 -









