भागवत कथा में रुक्मिणी विवाह,कंस वध और महारास प्रसंगों का हुआ भावपूर्ण वर्णन
Apr 28 2026
भितरवार। ग्राम खडीचा में श्री शीतला माता मंदिर परिसर में श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिवस कथा वक्ता ने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं में रुक्मिणी विवाह,कंस वध एवं महारास प्रसंग का विस्तार से वर्णन कर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कथा के दौरान उन्होंने भक्ति,प्रेम और धर्म की महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा गया कि भगवान की प्रत्येक लीला लोक कल्याण और धर्म स्थापना का संदेश देती है। कथा वक्ता पं हरिओम पांडे ने
कथा में रुक्मिणी विवाह प्रसंग सुनाते हुए बताया कि माता रुक्मिणी की अटूट भक्ति और समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण ने उनका हरण कर विधि-विधान से विवाह किया। यह प्रसंग प्रेम,विश्वास और भक्त-भगवान के दिव्य संबंध का प्रतीक है। इस प्रसंग के दौरान श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे नजर आए। कथा वक्ता ने कंस वध प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि अधर्म और अत्याचार का अंत निश्चित है। भगवान श्रीकृष्ण ने कंस का वध कर धर्म की स्थापना की और यह संदेश दिया कि सत्य की सदैव विजय होती है। कथा के इस प्रसंग को सुन श्रद्धालुओं में उत्साह और श्रद्धा का वातावरण बना रहा। महारास प्रसंग में कथा वक्ता ने बताया कि रास लीला आत्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। यह केवल नृत्य नहीं बल्कि परम भक्ति और प्रेम की सर्वोच्च अभिव्यक्ति है। महारास की दिव्य व्याख्या सुनकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए और पूरा पांडाल राधे-कृष्ण के जयकारों से गूंज उठा। कथा के दौरान भजन-कीर्तन,झांकियों और मंगल गीतों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त किया। इस मौके पर परिक्षित ठाकुर मजबूत सिंह श्रीमती गीता देवी,आशीष कमरिया ने भागवत कथा का पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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