ज्ञान का फल धन या प्रतिष्ठा नहीं परमात्मा से मिलना है
Apr 20 2026
ग्वालियर। दौलतगंज स्थित राजा बाक्षर के मंदिर पर चल रही भागवत कथा के सातवें दिन कथा व्यास हरिओम महाराज ने कहा जीव का परम कर्तव्य है भगवान की सेवा व साधना करना। इच्छा ही जीव के पुनर्जन्म का कारण है। जीव को माया ना पकड़ रखा है। जो परमात्मा की जय जयकार करता है वह माया के बंधन से मुक्त हो जाता है। उन्होंने कहा प्रभु ने पवित्र विचार करने के लिए पवित्र मन दिया है पवित्र विचार करने से ही मन शुद्ध होता है भगवान की लीलाओं का चिंतन करने से मन पवित्र हो जाता है। जीव व ब्रह्मा का मिलन होता है महाराज श्री ने भागवत कथा के सातवें दिन भगवान की अलग-अलग लीलाओं का वर्णन कियां सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा मित्रता कैसे की जाए यह कृष्ण सुदामा से सीखें। अंत में कथा परीक्षित श्रीमती रमा संतोष, श्रीमती कृतिका अंकित, श्रीमती रेणु गगन अग्रवाल, मंदिर के महंत तरुण सूर्यवंशी, हीरेंद्र सूर्यवंशी, नवीन परांडे आदि ने भागवत महापुराण की महा आरती की आरती के उपरांत प्रसादी वितरण किया गया।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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