रासलीला मनुष्य और प्रभु के मिलन की लीला है: हरिओम महाराज

Apr 19 2026

ग्वालियर। दौलतगंज स्थित राजा बाक्षर मंदिर पर चल रहे उर्स शताब्दी समारोह द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के छठवें दिन कथा वाचक हरिओम महाराज ने कहा की पूर्व जन्म में सुखदेव तोता थे एवं भागवत में श्रीराधा का नाम कहीं नहीं आता क्योंकि सुखदेव की गुरु राधा ही हैं। उन्होंने कहा की रासलीला कम विजय की लीला है भगवान श्रीकृष्ण द्वारा वृंदावन में गोपियों के साथ महा रास काम को जीतकर भक्ति में बदलने का संकेत देता है। उन्होंने कहा सर्वेश्वर भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रज में अनेकानेक बाल लीलाएं की जो वात्सल्य भाव के उपासकों के चित्त को अनायास ही आकर्षित करती है जो भक्तों के पापों का हरण कर लेते हैं वही श्री हरि है। 
हरिओम महाराज ने कहा की नंदालय में गोपियों का तांता लगा रहता है हर गोपी भगवान से प्रार्थना करती है कि किसी न किसी बहाने कन्हैया मेरे घर पधारे जिसकी भगवान के चरणों में प्रगाढ़ प्रीति है। वही जीवन मुक्त है एक बार माखन चोरी करते समय मैया यशोदा आ गई तो कन्हैया ने कहा की मैया तुमने इतनी मणिमय आभूषण पहना दिए हैं जिससे मेरे हाथ गर्म हो गए हैं तो माखन की हांडी में हाथ डालकर इन हाथों को शीतलता प्रदान कर रहा हूं। कथा में रुक्मणी विवाह के प्रसंग का संगीत में भावपूर्ण चित्रण किया गया। भगवान श्रीकृष्ण रुक्मणी के विवाह की झांकी ने सबका मन मोह लिया, भगवान श्रीकृष्ण की बारात बैंड बाजों एवं आतिशबाजी के साथ निकाली गई। कृष्ण रुक्मणी विवाह पर फूलों की होली भी खेली गई कथा व्यास जी ने कहा जो भक्त प्रेमी कृष्ण रुक्मणी के विवाह उत्सव में शामिल होते हैं उनके वैवाहिक समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है जीव परमात्मा का अंश है श्री कृष्ण रुक्मणी विवाह ज्ञान भक्ति और प्रेम का अद्भुत संगम है। कथा के अंत में परीक्षित श्रीमती रमा संतोष कृतिका अंकित रेनू गगन अग्रवाल मंदिर के महंत तरुण सूर्यवंशी सुनील सूर्यवंशी अजय दुबे प्रताप शर्मा गगन यादव अंकित कुकरेजा योगेश बेदोरिया हिरेंद्र सूर्यवंशी बाबूलाल चौरसिया मनी रामपाल रामबाबू अग्रवाल सहित अनेक लोगों ने श्रीमद् भागवत महापुराण की आरती की आरती को उपरांत प्रसादी वितरण किया गया