भगवान कृष्ण द्वारा इंद्र का अभिमान चूर करने के लिए गोवर्धन पर्वत उठाया

Apr 18 2026

ग्वालियर। दौलतगंज स्थित राजा बाक्षर मंदिर पर चल रहे उर्स शताब्दी समारोह में चल रही भागवत कथा के पांचवें दिन कथा वाचक हरिओम महाराज ने कहा कि संसार में रहते हुए समस्त ज्ञान प्राप्त किया, परंतु प्रभु का ज्ञान नहीं है तो उसका जीवन अपवित्र है शरीर बाहर से बहुत अच्छा है लेकिन हृदय के अंदर जहर भरा हुआ है वही पूतना है। उन्होंने श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुनाते हुए कहा की किस प्रकार बंदी घर के द्वार खुले और वासुदेव ने भगवान श्रीकृष्ण को यमुना पार गोकुल में छोड़ा। जहां उनका लालन पालन यशोदा नंद बाबा ने किया, जब कंस को इस बात का पता चला की देवकी की गर्भ का आठवें बालक ने जन्म लिया है और वह गोकुल में निवास कर रहा है। इस बात को लेकर कंस ने पूतना को नन्हे बालक को मारने के लिए गोकुल भेजा।
महाराज श्री ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा की पवित्र मन ही माखन है जिसका मन पवित्र होता है भगवान इस के घर पधार कर उसके हृदय में वास कर लेते हैं। प्रत्येक इंद्रियों से जो भक्ति रस का पान करता है वह गोपी है वर्तमान में मनुष्य शरीर की अपेक्षा मन से अधिक पाप करते हैं यशोदा मतलब जो दूसरों को यस दे भगवान उसी की गोद में रहते हैं उन्होंने कहा अघासुर अजगर का रूप लेकर आया और प्रभु को निकलने लगा तब पाप को भगवान ही मारते हैं। उन्होंने कथा को आगे बढ़ते हुए गोवर्धन की व्याख्या करते हुए कहा कि गौ का अर्थ है भक्ति भक्ति को बढ़ाने वाली लीला ही गोवर्धन लीला है उन्होंने कहा की दीपावली के दूसरे दिन भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को उठाया था जब महाराज श्री हरि ओम जी महाराज ने मैं तो गोवर्धन को जाऊंगी भजन गाया तो समस्त श्रोतागण नृत्य करने लगे और पूरा वातावरण भक्तिमय बन गया भगवान श्री कृष्ण ने इंद्र के घमंड को चकनाचूर करने के लिए अपनी उंगली पर गोवर्धन पर्वत धारण किया और गिर्राज धरण कहलाए जब इंद्र का घमंड चकनाचूर हुआ तो इंद्र ने भगवान का दूध से अभिषेक किया एवं प्रभु से क्षमा मांगी। गोवर्धन पूजा के तहत भगवान कृष्ण को छप्पन भोग भी लगाए गए।
कथा के उपरांत परीक्षित श्रीमती रमा संतोष कृतिका अंकित रेनू गगन अग्रवाल मंदिर के महंत तरुण सूर्यवंशी सुनील सूर्यवंशी अजय दुबे प्रताप शर्मा गगन यादव हिरेन्द्र सूर्यवंशी अंकित कुकरेजा योगेश बेदोरिया बाबूलाल चौरसिया मनीराम पाल रामबाबू अग्रवाल सहित अनेक लोगों ने श्री भागवत महापुराण की आरती की आरती के उपरांत प्रसादी वितरण की गई।