भोजन सरस होगा तो भजन नीरस होगा: राघव ऋषि

Apr 15 2026

ग्वालियर। ऋषि सेवा समिति ग्वालियर के तत्वावधान में श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस राघव ऋषि ने दिव्य रहस्य उद्घाटित करते हुए नन्द महोत्सव का शुभारंभ किया तो सम्पूर्ण प्रांगण ब्रजमय बन गया। पुष्पवृष्टि से लोगों ने बालकृष्ण भगवान का जन्मोत्सव मनाया। नन्द अर्थात् जो सभी को आनन्द दे। मनुष्य जन्म सभी को आनन्द देने के लिए है। सौरभ ऋषि ने 'नन्द घर आनन्द भयो जय कन्हैया लाल कीÓ भजन गाया तो सभी श्रोतागणों ने  खड़े होकर आनन्द में झूमते हुए नंदोत्सव मनाया। इस अवसर पर सभी को माखन प्रसाद दिया गया। 
राघव ऋषि ने कहा कि प्रत्येक इंद्रियों से जो भक्त रस का पान करता है वो गोपी है। लोग शरीर की अपेक्षा मन से अधिक पाप करते हैं। शरीर को मथुरा और हृदय को गोकुल यदि नंदरूपी जीव बनता है तो प्रभु की कृपा प्राप्त होती हैं। भगवान ने बाललीला में सबसे पहले पूतना का वध किया। पुत+ना अर्थात् जो पवित्र नहीं है वो है पूतना। अज्ञान पवित्र नहीं है। संसार में रहते हुए समस्त ज्ञान प्राप्त किया परन्तु भगवान का ज्ञान नहीं है तो उसका जीवन अपवित्र है। जिसकी आकृति सुन्दर हैं। एवं कृति बुरी है वही पूतना है शरीर बाहर से तो सुन्दर है। किन्तु हृदय विष से भरा हुआ है । वहीं पूतना है। जीव तर्क कुतर्क कर के भगवान पर कटाक्षेप करता है फिर भी प्रभु उस पर कृपा कर सद्गति देते है।
मखनचोरी लीला का वर्णन करते हुए  ऋषि ने बताया कि प्रवित्र मन ही माखन है जिसका मन पवित्र होता है भगवान उसी के घर पधारकर उसके हृदय को चुरा लेते है गोपियां तल्लीन होकर घर-गृहस्थी के कार्य करते हुए भगवान के लिए माखन विलोडती है। कथास्थल पर माखन की हांडी भगवान ने फोड़ कर सभी को प्रसाद बांटा।