न्यूरोसर्जरी विभाग अब तक 61 न्यूरोसर्जरी विशेषज्ञ डॉक्टर देश को दे चुका है : डॉ अविनाश शर्मा

Apr 09 2026

ग्वालियर। ग्वालियर जीआरएमसी का न्यूरोसर्जरी विभाग मध्य भारत का सबसे पुराना विभाग है। यहां प्रतिवर्ष 8 न्यूरोसर्जन प्रशिक्षित होते हैं और अब तक 61 न्यूरो विशेषज्ञ विशेषज्ञ डॉक्टर इस संस्थान से प्रशिक्षित होकर देशभर में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ये जानकारी न्यूरोसर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ अविनाश शर्मा ने दी। वे न्यूरोसर्जन हार्वे कुशिंग की जयंती के उपलक्ष्य में विश्व न्यूरोसर्जन दिवस में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे। इसका आयोजन न्यूरोसर्जरी विभाग के सेमिनार हॉल में किया गया। उन्होंने पीजी छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि एक सफल न्यूरोसर्जन के लिए चार मूल स्तंभ—स्वयं के प्रति ईमानदारी, मरीजों के प्रति संवेदनशीलता, उचित डॉक्यूमेंटेशन एवं कानूनी समझ, तथा कठिन परिश्रम, धैर्य एवं समर्पण अत्यंत आवश्यक हैं। इसी क्रम में प्रो. डॉ. अवधेश शुक्ला ने विभाग के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डालते हुए युवा चिकित्सकों को इस विरासत को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर डॉ. हार्वे कुशिंग के जीवन, उनके शोध, नवाचारों तथा न्यूरोसर्जरी को एक स्वतंत्र विशेषज्ञता के रूप में स्थापित करने में उनकी भूमिका पर एक संक्षिप्त प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान न्यूरोसर्जरी विभाग के रेजिडेंट्स द्वारा किया गया। डॉ. कुशिंग को आधुनिक न्यूरोसर्जरी का जनक माना जाता है और उनके योगदान को स्मरण करते हुए जीआर मेडीकल कॉलेज के न्यूरो सर्जरी विभाग में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में न्यूरोसर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. अविनाश शर्मा, न्यूरोमेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. दिनेश उदैनिया, न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रो. डॉ. अवधेश शुक्ला, प्रो. डॉ. आदित्य श्रीवास्तव, डॉ. अरविंद गुप्ता, डॉ. आनंद शर्मा, डॉ. विवेक कनकने सहित विभिन्न विभागों के चिकित्सक, रेजिडेंट्स, नर्सिंग स्टाफ एवं ओटी टेक्नीशियन्स उपस्थित रहे।
पीजी चिकित्सा छात्रों को सफल जीवन जीने के दिए 4 सिद्धांत
न्यूरोसर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ अविनाश शर्मा ने पीजी चिकित्सा छात्रों को सफल जीवन जीने 4 सिद्धांत देते हुए कहा कि हमेशा अपने चिकित्सा कार्य में ऑनेस्टली, एथिकली, ज्यूडिशियसली, सिम्पेथेटिकली इन चार बातों का जरूर ध्यान रखें। अर्थात स्वयं के प्रति ईमानदार, नैतिकता पूर्ण और मरीज के प्रति सहानुभूति रखते हुए कानूनी नियमों में चिकित्सा कार्य करें।
पैसे से खुशी नहीं मिलेगी, खुशी मरीज के की खुशी से ही मिलेगी
न्यूरोसर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ अविनाश शर्मा ने चिकित्सा छात्रों को अपना अनुभव समझाते हुए कहा कि आप सभी लोग पैसा तो बहुत कमाओगे,लेकिन पैसे से खुशी नहीं मिलती। खुशी तब मिलेगी,जब आपका मरीज ठीक हो जाएगा। मरीज़ और उसके परिजनों की खुशी देखकर आपको खुशी मिलेगी। वो खुशी पैसे से कहीं ज्यादा बड़ी होगी।