उरांव आदिवासी समाज ने नृत्य, संगीत के साथ मनाया सरहुल पर्व
Apr 02 2026
ग्वालियर। उरांव एवं अन्य आदिवासी समाज संगठन समिति ने गुरुवार को आदिवासी समाज का मुख्य पर्व (खद्दी पर्व) शहर में पारंपरिक तरीके से मनाया गया। इस मौके पर सरना मां धरती माता के देव स्थान जिगसौली में पारंपरिक तरीके से पूजा अर्चना की गई। साथ ही मांदर की थाप पर समाज के लोगों ने मनोहारी नृत्य किया।
समिति के सचिव रामेश्वर राम पटेल ने बताया कि सरहुल पर्व पर सुबह जिगसौली स्थित सरना स्थल पर बैगा रघुवीर भगत एवं सह बैगा मंगल राम भगत ने सरई फूल और पवित्र जल से सरना देव और चाला अयंग देवी की पूजा की। शाम को किरार भवन, गांधी रोड ने सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें युवक युवतियों व बच्चों ने नृत्य, गीत गाकर आदिदेव को खुश किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रामेश्वर राम पटेल ने बताया कि उरांव समाज के झंडे का रंग सफेद होता है, जिसमें लाल रंग से चांद और सूरज बने होते हैं। झंडे का सफेद रंग शांति का और उसमें दिया गया लाल रंग शौर्य व मेहनत का प्रतीक है। उन्होंने उरांव समाज को अपनी पारंपरिक परंपराएं बनाए रखने का संकल्प भी दिलाया। इस दौरान आदिवासी समाज को धन धान्य से परिपूर्ण करने के साथ अच्छी बारिश के लिए कामना की गई। वहीं रात में भक्तों ने माता पार्वती की विधि विधान से पूजा की और रात्रि जागरण किया। इस दौरान चांद तारों का गुणगान किया। इस अवसर पर अध्यक्ष जगपति भगत, कोषाध्यक्ष जतरूराम भगत, गुरुचरण भगत, लालसाय भगत, निर्मल भगत, देवचरण भगत, सतीश भगत, उषा भगत, जनमन भगत, सुनील भगत, अजीत भगत, मनमती भगत, पतरू राम भगत, श्याम भगत, लालमंती भगत, सरस्वती, कमला भगत, विजेंद्र भगत, राजकुमार भगत, महावीर भगत, जीवंती, बसंती, सुशीला भगत, पार्वती पटेल, राखी भगत आदि समाज के लोग उपस्थित रहे।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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