चंबल के बीहड़ो के बीच है खांद वाली माता, हर मनोकामना करती है पूर्ण
Mar 28 2026
ग्वालियर। ग्वालियर जिला मुख्यालय से लगभग 75 किलोमीटर दूर वहीं मुरैना से 35 किलोमीटर दूर चंबल के वीहड़ो में विराजमान है खांद वाली, यह माता का मंदिर लगभग ढाई सौ से 300 वर्ष पुराना है। उक्त जानकारी मंदिर के महंत उमेश दुबे ने दी। उन्होंने बताया कि यह माता खदान में से निकली थी इसलिए माता का नाम पहले खदान वाली माता था। वर्तमान में खांद वाली माता कहा जाता है।
ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में जो भी भक्त आकर के मैया से अपनी इच्छा मांगता है वह मनोकामना पूर्ण होती है इसीलिए यहां राजस्थान ग्वालियर चंबल क्षेत्र से हजारों श्रद्धालु प्रतिदिन दर्शन के लिए पहुंचते हैं। नवरात्रों में यहां बहुत बड़ा मेला लगता है एवं नवमी वाले दिन जात भी भरी जाती है। वही खदान में स्थित माता के प्राचीन मंदिर के महंत गणेश दुबे ने बताया कि यहां पर जब खदानों की खुदाई हो रही थी तब उसमें साक्षात मैया की मूर्ति निकली जिस स्थान पर मूर्ति प्रकट हुई वहां उनका प्राचीन मंदिर बना हुआ है। क्योंकि यह मंदिर थोड़ा नीचे जाकर है इसलिए भक्तों द्वारा एक नवीन मंदिर की स्थापना ऊपर की गई है। सूत्र बताते हैं कि चंबल के बागी भी यहां माथा टेकने आते थे और अपनी मनोकामना पूर्ण होने पर घंटा भी चढ़ाते थे। नवरात्रि में यहां मेला लगता है और दूर-दूर के गांव वाले निशान चढ़ाने आते हैं वही दूर-दूर से महिलाएं आकर लांगुरिया भजन गाकर मैया को प्रसन्न करने का प्रयास करती है।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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