पेंशनर्स से सरकार डरी, शांतिपूर्ण आंदोलन की अनुमति एन बक्त पर निरस्त
Mar 18 2026
ग्वालियर। पेंशनर्स एसोसिएशन एक मंच एक आवाज एवं भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ मध्य प्रदेश के संयुक्त तत्वावधान में आकाशवाणी तिराहा ग्वालियर पर पेंशनर्स की जायज मांगों को लेकर एक दिवसीय शांतिपूर्ण आंदोलन की कड़ी में मानव श्रृंखला का आयोजन दोपहर 1 बजे किया गया था। पेंशनर्स से डरकर सरकार ने शांतिपूर्ण आंदोलन की अनुमति नहीं दी।
पेंशनर एसोसिएशन एक मंच एक आवाज मध्य प्रदेश से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कार्यकारी प्रांताध्यक्ष आरएस तरेटिया ने बताया हे कि मध्य प्रदेश सरकार पेंशनर्स की जायज मांगों के लिए होने वाले शांतिपूर्ण आंदोलन से घबड़ा गई हे इसी कारण बुजुर्ग पेंशनर्स को अपनी बात रखने की अनुमति नहीं दी हे। श्री तरेटिया ने बताया कि हमारा आंदोलन शांतिपूर्ण था जिसके माध्यम से हम अपनी बात सरकार तक पहुंचना चाहते थे।
हमारा कहना हे कि पेंशनर्स को डीआर केंद्र की घोषणा के साथ ही दिया जावे उसमें किसी भी प्रकार की कटौती ना की जावे तथा अभी तक कटे गए डीआर का भुगतान किया जावे। भुगतान सर्वोच्च न्यायालय ने साफ कहा हे कि पेंशन ओर डीआर पेंशनर्स के सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार हे जिसका तत्काल भुगतान किया जाए। साथ ही हमारी मांगें थीं कि नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा। धारा 49 (6) हटाने। वृद्ध पेंशन वृद्धि 80 वर्ष की आयु पूर्ण करने के स्थान पर 65 से की जाए। 65 वर्ष पर 5',70 वर्ष पर 10', 75 वर्ष पर 15' एवं 80 वर्ष पर 20' की जाए। पेंशनर्स को 50 हजार रूपए एसग्रेशिया दिया जाए। पेंशनर्स की आय सांसदों एवं विधायकों की तरह आयकर से मुक्त की जाए। छठवें एवं सातवें वेतन आयोग का एरियर क्रमश: 32 एवं 27 माह का तत्काल भुगतान किया जाए।
सरकार द्वारा अनुमति न देने के कारण समस्त पेंशनर्स ने पेंशनर एसोसिएशन एक मंच एक आवाज मध्य प्रदेश के कार्यालय में बैठकर सभा की तथा अपने अपने विचार व्यक्त किए सभी संगठनों ने कहा कि सरकार हमारी मांगों के शांति पूर्ण आंदोलन से डरकर अनुमति नहीं दे रही है। यह सरकार की हठधर्मिता हे, पेंशनर्स पर अत्याचार हे जिसकी आलोचना करते हैं इसका परिणाम सरकार को आगे भुगतना होगा। साथ ही यह तय किया कि 30 मार्च सोमवार को शाम 4 बजे कलेक्टर कार्यालय पर उपस्थित होकर ज्ञापन देंगे। तथा केंद्र की घोषणा के साथ ही राज्य के कर्मचारियों को भी डीआर देने एवं अभीतक काटे गए डीआर के भुगतान के लिए उच्च न्यायालय में सभी संगठन मिलकर एकसाथ जाएंगे।
सरकार के इस निर्णय की आलोचना करने वालों में गीता भारद्वाज, नंदकिशोर गोस्वामी, आरपी कोरी, नरेंद्र चौधरी, जयंती लाल जाटव, एसके जायसवाल, एनआर अतरोलिया, वीपी गणक, गोपी गोयल, रमाकांत गौतम, जनाब शेख गनी, बीएम शर्मा, एसपी त्रिपाठी, जनाब निशार अहमद, शिवराज सिंह, एसएम बहल, प्रदीप खरे आदि शामिल हैं।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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