स्वस्थ लोग चुस्त दुरुस्त रहने के लिए फिजियोथैरेपिस्ट की सलाह लें:विधानसभा अध्यक्ष

Mar 15 2026

ग्वालियर। अत्याधुनिक मशीनों व कसरत के जरिए न केवल रोगियों को संजीवनी दी जा रही है, बल्कि मुरझाए चेहरों पर मुस्कान बिखेरने का काम फिजियोथैरेपी में हो रहा है। यह बात मप्र विधानसभा के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कही। वे रविवार को होटल लैंडमार्क में मातृत्व जनआरोग्य एवं शिक्षा समिति और ग्वालियर एसोसिएशन ऑफ फिजियोथैरेपी के पहला अंतरराष्ट्रीय ग्वालियर फिजियो मंथन का शुभारंभ सत्र को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। विशिष्ट अतिथि जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजकुमार आचार्य, न्यूरोसर्जन डॉ. कमल वर्मा, मध्य क्षेत्र कार्यकारिणी सदस्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यशवंत इंदापुरकर एवं आरोग्य भारती के प्रांत संगठन मंत्री मुकेश दीक्षित उपस्थित रहे। 
समारोह की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके बाद मंचासीन अतिथियों का स्वागत आयोजन समिति के डॉ. सूर्यकांत अग्निहोत्री एवं डॉ. अभिषेक यादव ने किया। मुख्य अतिथि तोमर ने कहा कि केवल रोगी ही नहीं, बल्कि स्वस्थ्य लोग भी चुस्त-दुरुस्त रहने के लिए फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह ले सकते हैं। इस मौके पर जीआरएमसी के फिजियोथैरेपिस्ट डॉ. वैभव चौबे ने फिजियोथैरेपी की काउंसिलिंग बनाने का प्रस्ताव रखा, जिस पर विधानसभा अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से चर्चा कर स्वीकृति दिलाने का आश्वासन दिया। प्रो. राजकुमार आचार्य ने कहा कि फिजियोथैरेपी केवल चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि मरीजों के जीवन में खुशहाली और आत्मनिर्भरता वापस लाने वाली सेवा है। फरीदाबाद के न्यूरोसर्जन डॉ. कमल वर्मा ने कहा कि न्यूरोसर्जरी के बाद फिजियोथैरेपी बहुत जरुरी है। यह मांसपेशियों की ताकत बढ़ाने, संतुलन सुधारने, दर्द कम करने, नसों की रिकवरी में सहायता करने और सामान्य जीवन में जल्दी लौटने के लिए आवश्यक है। साथ ही यह सर्जरी की जटिलताओं के जोखिम को कम करती है। अंत में डॉ. सूर्यकांत अग्निहोत्री, डॉ. अभिषेक यादव ने अतिथियों एवं देश विदेश से आए विशेषज्ञों को पौधा एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। संचालन डॉ. रजनीश नीखरा एवं आभार डॉ. नीलिमा जौहरी ने व्यक्त किया। इस अवसर पर डॉ. दिनेश गुर्जर, डॉ. लाव्या गोयल, डॉ. गरिमा गर्ग, डॉ. आस्था श्रीवास्तव, डॉ. पूजा गुप्ता, डॉ. तुषार घोडक़े, डॉ. हरिओम शर्मा, डॉ. विश्वाकाश जैन, डॉ. विक्रांत अवस्थी, डॉ. हेमेन्द्र यादव, डॉ. विकास सविता, डॉ. आनंद थापक सहित 350 फिजियोथैरेपिस्ट उपस्थित रहे। 
इस अवसर पर डॉ. शबाना सईद दुबई, डॉ. अंकित शर्मा कनाडा, डॉ. के.पल्सन बैंगलोर, डॉ. जगप्रीत सिंह भोपाल, डॉ. हर्ष.एम.राजदीप कोटा, डॉ. मुकेश.बी.छाबड़ा मुंबई, डॉ. अनुराग शर्मा द्वारका के अलावा डॉ. डी.विजय, डॉ. आनंद मिश्रा, डॉ. जीआर सुरेश, डॉ. मनीष श्रीवास्तव, डॉ. जगदीश जायसवाल, डॉ. विवेक श्रीवास्तव, डॉ. रोहित श्रीवास्तव आदि ने फिजियोथैरेपी के नए आयामों व आधुनिक तकनीकों पर विचार रखे।
फिजियोथैरेपिस्ट आईसीयू टीम का अभिन्न अंग हैं, जो रोग की गंभीरता के अनुसार व्यक्तिगत रूप से पुनर्वास योजना बनाते हैं। यह गहन देखभाल के दौरान गंभीर रूप से बीमार रोगियों में लंबे समय तक बिस्तर पर रहने (बेड रेस्ट) से होने वाली मांसपेशियों की कमजोरी और यांत्रिक वेंटिलेशन के प्रतिकूल प्रभावों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
-डॉ. शबाना सईद, दुबई
समय के साथ मशीनों के जरिये लोगों का दर्द दूर किया जा रहा है। हड्डी, नसें और शरीर के जोड़ के दर्द दूर करने के लिए फिजियोथैरेपी सबसे बेहतर इलाज है। इसमें दर्द निवारक दवाओं की जरूरत नहीं पड़ती। 
-डॉ. अंकित शर्मा, कनाडा
गलत पोस्चर (पोजीशन) रीढ़ की हड्डी पर दबाव बढ़ाकर डिस्क हर्निएशन, साइटिका, क्रोनिक पीठ व गर्दन के दर्द जैसी गंभीर बीमारियां पैदा कर रहा है। झुककर बैठने या स्क्रीन देखने से कशेरुकाओं पर असमान दबाव पड़ता है। यह रीढ़ की प्राकृतिक बनावट को बिगाडक़र काइफोसिस (कूबड़) और मांसपेशियों में असंतुलन का कारण बनता है।
-डॉ. के.पल्सन, बैंगलोर
पैर के पंजे की फिजियोथैरेपी और न्यूरोलॉजिकल उपचार से तंत्रिका क्षति, झुनझुनी, सुन्नता और कमजोरी (जैसे न्यूरोपैथी) को ठीक किया जा सकता है। इसमें मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम, तंत्रिका गतिशीलता, संतुलन प्रशिक्षण और लेजर व अल्ट्रासाउंड थैरेपी का उपयोग किया जाता है, ताकि चलने में सुधार हो और दर्द कम हो। 
-डॉ. जगप्रीत सिंह, भोपाल
फिजियोथैरेपी में अब वर्चुअल रियलिटी (वीआर), एआई-आधारित विश्लेषण, पहनने योग्य सेंसर और रोबोटिक-असिस्टेड थैरेपी जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग बढ़ रहा है, जो तेजी से रिकवरी और व्यक्तिगत उपचार सुनिश्चित करती हैं। 
-डॉ. हर्ष.एम.राजदीप, कोटा
फिजियोथैरेपी और आयुर्वेद का संयोजन जोड़ों के दर्द, मांसपेशियों की अकडऩ, पुरानी बीमारियों और न्यूरोलॉजिकल विकारों के लिए एक प्रभावी और समग्र उपचार पद्धति है। आयुर्वेद हर्बल तेलों और पंचकर्म से आंतरिक उपचार और सूजन कम करता है, जबकि फिजियोथेरेपी व्यायाम के माध्यम से गतिशीलता और मजबूती बढ़ाती है, जिससे दर्द से तेज और स्थायी राहत मिलती है।
-डॉ. मुकेश.बी.छाबड़ा, मुंबई
न्यूरोसर्जरी के बाद फिजियोथैरेपी अनिवार्य है, क्योंकि यह मांसपेशियों की ताकत, शारीरिक संतुलन और गतिशीलता को वापस लाने में मदद करती है। यह दर्द और अकडऩ को कम कर, नसों की रिकवरी में तेजी लाती है और रोगी को जल्दी सामान्य जीवन में लौटने में सहायक होती है। 
-डॉ. अनुराग शर्मा, द्वारका