कृत्रिम बुद्धिमत्ता से पुस्तकालय के कामों को सरल बनाया जा सकता है: कुलगुरु प्रो. आचार्य
Mar 11 2026
ग्वालियर। युवाओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के परिचित होने की आवश्यकता है। इसका उपयोग बेहतर भविष्य के निर्माण में योगदान दे सकता है। साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग से पुस्तकालय के कामों को सरल बनाया जा सकता है। वहीं प्राचीन साहित्य को भी सहजने का दायित्व लाइब्रेरी पर है। यह बात जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजकुमार आचार्य ने श्यामलाल पाण्डवीय शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय (एसएलपी) में आंतरिक गुणवत्ता एवं आश्वासन प्रकोष्ठ द्वारा पुस्तकालय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं चुनौतियां विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में मुख्य अतिथि की आसंदी से कही। अध्यक्षता अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. जेएन गौतम ने की। विशिष्ट अतिथि राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय की कुलगुरु डॉ. स्मिता सहस्त्रबुद्धे थीं। बीज वक्ता एमएलबी कॉलेज के पुस्तकालय विज्ञान के प्राध्यापक डॉ. अरविंद शर्मा थे। विशिष्ट व्याख्यान के रूप के आईआईआईटीएम के ग्रंथपाल डॉ. गोपाल जादौन, बुंदेलखंड विवि झांसी की सहायक प्राध्यापक डॉ. ज्योति गुप्ता, जेयू के पुस्तकालय विज्ञान के विभागाध्यक्ष डॉ. हेमंत शर्मा, महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एसएस तोमर, संगोष्ठी संयोजक केशव किशोर शुक्ला एवं आयोजन सचिव डॉ. विजय कुमार शर्मा रहे।
संगोष्ठी के संरक्षक डॉ. शत्रुघ्न सिंह तोमर ने अतिथियों एवं शोधार्थियों का स्वागत करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि इससे प्राप्त सारांश को उच्च शिक्षा के हितार्थ विभाग एवं शासन को अवगत कराया जाएगा। डॉ. विजय कुमार शर्मा ने संगोष्टी के उद्देश्यों एवं स्वरूप पर प्रकाश डाला। डॉ. स्मिता सहस्त्रबुद्धे ने कहा कि नाट्यशास्त्र जैसे प्राचीन ग्रंथों को पढऩे और पाठकों में पठन पाठन के प्रति बढ़ती अरूचि पर प्रकाश डाला। डॉ. अरविंद शर्मा ने पुस्तकालय के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग एवं चुनौतियों से अवगत कराया। डॉ. ज्योति गुप्ता ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिवता किस प्रकार पुस्तकालय में उपयोगकर्ता की चेक इन एवं चेकआउट को ट्रैक करने में कृत्रिम बुद्धिमता की मदद ली जा सकती है। डॉ. गोपाल सिंह जादौन ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता पुस्तकालय सेवाओं और उपयोगकर्ता अनुभव को बढ़ा सकती है। प्रो. जेएन गौतम ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग से लाइब्रेरी का ऑटोमेशन विद्यार्थियों एवं उच्च शिक्षा विभाग के लिए महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। द्वितीय सत्र में डॉ. हेमंत शर्मा ने विचार रखे। संचालन डॉ. ऋचा सक्सेना एवं आभार डॉ. विजय कुमार शर्मा ने व्यक्त किया।
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Rajesh Jaiswal
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