सोशल मीडिया का जमाना और आर्थिक तंगी से जूझता पत्रकार-विनोद गुप्ता
Feb 26 2026
ग्वालियर। कंप्यूटर युग को लगभग दो दशक बीत चुके हैं लेकिन कोरोना काल से मोबाइल युटुब इंस्टाग्राम जेसे सोशल मीडिया की आंधी आ चुकी है। जो कि कहीं ना कहीं हर व्यक्ति के लिए लाभदायक भी है लेकिन 18 वर्ष से कम बच्चों के लिए यह कुछ मायनों में हानिकारक भी है। मोबाइल आने से हर मनुष्य की जिंदगी बदल चुकी है इसका जीता जागता उदाहरण है कि आज से लगभग तीन दशक पहले जब सोशल मीडिया नहीं था तब अधिकारी नेता अभिनेता देश के चौथे स्तंभ यानि पत्रकार को एक सम्मान की दृष्टि से देखा जाता था। लेकिन सोशल मीडिया के एक्टिव होते ही पत्रकारों की पूछ परख काफी कम हो चुकी है और सोशल मीडिया के पत्रकार पत्रकारिता पर हावी हो चुके हैं। जिससे देश का चौथा स्तंभ टूटने के कगार पर खड़ा हो चुका है।
वही पुराने पत्रकार आज भी आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं क्योंकि सोशल मीडिया वर्तमान युग में पत्रकारिता पर हावी हो चुका है क्योंकि आज के युग में छोटे से लेकर बड़ा कोई व्यक्ति हो सोशल मीडिया पर एक्टिव रहता है कहीं भी जरा सी घटना घटी तो सोशल मीडिया के माध्यम से पूरे देश में खबर फैल जाती है जिसकी कोई जांच पड़ताल नहीं की जाती तीन दशक पहले तक यदि कोई घटना दुर्घटना या किसी राजनीतिक नेता की खबर लगती थी तो उसका रिएक्शन तुरंत होता था। लेकिन वर्तमान में ऐसा नहीं हो रहा है आज के वर्तमान युग में कुछ पुराने पत्रकारों ने पत्रकारिता से संन्यास भी ले लिया है। इसका मुख्य कारण आर्थिक तंगी भी है तीन दशक पहले तक विज्ञापन के लिए विज्ञापनदाता स्वयं समाचारों के लिए स्थानीय संस्था में आते थे। लेकिन अब यह इस दौर में मुमकिन नहीं है।
बात यदि देश के चौथे स्तंभ की करें तो वर्तमान में अधिकारी कर्मचारी भी किसी खबर से अपना पल्ला झाड़ लेते हैं अभी ग्वालियर में ही काफी पत्रकार आर्थिक तंगी के चलते गुमनामी की जिंदगी जी रहे हैं बात तो यहां तक पता चलती है कई पत्रकारों के परिवार तो ऐसे हैं की पत्रकार के निधन के बाद कोई आर्थिक सहायता नहीं मिली पहले पत्रकारिता आम जनता के मुद्दे और जनता की बात सरकार तक पहुंचाना पत्रकार का लक्ष्य माना जाता था। लेकिन वर्तमान में देखा जा रहा है की सोशल मीडिया इस कदर हावी हो चुका है जिसका जवाब मिलना मुश्किल है। लेकिन सोशल मीडिया के माध्यम से आज की पत्रकारिता चाटुकारिता की रह गई है जनसुनवाई जैसी जगह पर भी सोशल मीडिया को देखा जा सकता है आज के युग मे सोशल मीडिया के माध्यम से आर्थिक तंगी से भी दूर रखा जा सकता है लेकिन निष्पक्ष ईमानदार एवं साफ स्वच्छ छवि के पत्रकार आज के दौर में बहुत कम है और जो है वह आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं मेरा मानना है कि देश का चौथा स्तंभ अब टूटने के कगार पर है क्योंकि वह पत्रकारता नहीं रही जो रहनी चाहिए।
संपादक
Rajesh Jaiswal
9425401405
rajeshgwl9@gmail.com
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