संगठित हिंदू समाज ही पूरे विश्व को दिशा दे सकता है-डॉ. कृष्ण गोपाल
Feb 19 2026
ग्वालियर। एकत्व की भावना ही हिंदुत्व है। सर्वत्र ईश्वर का दर्शन ही सनातन भारत का दर्शन है। हिंदू सर्वे भवंतु सुखिन की कामना करता है, जबकि अन्य देश सिर्फ अपनी ही भलाई चाहते हैं। इसलिए संगठित हिंदू समाज ही पूरे विश्व को दिशा दे सकता है।
यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल ने राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के दत्तोपंत ठेंगड़ी सभागार में आयोजित प्रमुखजन गोष्ठी में मुख्य वक्ता की आसंदी से कही। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ग्वालियर विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में विभाग संघचालक प्रहलाद सबनानी भी मंचासीन रहे। मुख्य वक्ता डॉ.कृष्ण गोपाल ने संघ की 100 वर्ष की यात्रा पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि किसी भी संगठन के लिए शताब्दी वर्ष महत्वपूर्ण बात है। आज संघ की समाज में स्वीकार्यता बढ़ी है, लेकिन संगठन को सभी लोग निकटता और गहराई से समझें इसलिए शताब्दी वर्ष में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। संघ की व्यक्ति निर्माण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण की कार्य कार्यप्रणाली पर आज जर्मनी, रूस सहित 50 देश शोध कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भारत प्राचीनकाल से ही विश्व का समृद्ध देश रहा है, जो दुनियाभर में ज्ञान के अलावा वस्तुओं का निर्यात करता था। इसका उल्लेख विदेशी लेखकों ने भी किया है। फिर भी हमारे देश को पराधीन होना पड़ा। समाज को संगठित करने के लिए उन्होंने 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की। प्रारंभिक दौर में उपेक्षा और तीन बार प्रतिबंध लगाकर लाखों स्वयंसेवकों को जेल में डाल दिया गया। महात्मा गांधी की हत्या कराने का आरोप लगाकर संगठन की छवि धूमिल करने का कुत्सित प्रयास किया गया। इसके बाद भी संगठन और मजबूती से आगे बढ़ा। वर्तमान में संघ की देशभर में 90 हजार शाखाएं हैं। उन्होंने कहा कि धर्म केवल रिलीजन नहीं, यह कर्तव्य है। इसलिए लोगों को माता-पिता सहित समाज और राष्ट्र के प्रति भी अपने कर्तव्य का निर्वहन ईमानदारी से करना चाहिए। उन्होंने समाज से संगठित होकर देशहित में कार्य करने का आह्वान किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में प्रस्तावना संघ के ग्वालियर विभाग कार्यवाह निरुपम नेवासकर ने रखी। एकल गीत हिमांशु गौड़ ने प्रस्तुत किया। संचालन अभिभाषक रविंद्र दीक्षित ने एवं आभार सह कार्यवाह मुनेंद्र कुशवाह ने व्यक्त किया।
पश्चिमी उपभोक्तावादी सुनामी से बचें
सह सरकार्यवाह ने रतन टाटा, बिडला, पूर्व राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद, अब्दुल कलाम आजाद के प्रेरक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि हमें आज पश्चिमी उपभोक्तावादी सुनामी से बचना चाहिए। लोग वाहन, मोबाइल, कपड़े सहित अन्य सामान को जल्दी-जल्दी बदल रहे हैं। पेट्रोल-डीजल, कोयला की खपत और पेड़ों के अंधाधुंध काटने से वातावरण दूषित हो रहा है। इससे ओजोन परत में भी छेद हो गया है, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। प्रकृति के दोहन से दुनिया भयंकर आपदा की चपेट में आ रही है। इससे बचने का एकमात्र उपाय भारतीय दर्शन ही है।
संपादक
Rajesh Jaiswal
9425401405
rajeshgwl9@gmail.com
MP Info News
Invalid RSS feed URL.
ब्रेकिंग न्यूज़
विज़िटर संख्या
अन्य ख़बरें
-
-
-
*हेमू कालानी जन्मोत्सव मिष्ठान वितरण कर बनाया* *
—03/23/2019 -









