महर्षि दयानंद ने समाज सुधार की नई क्रांति का सूत्रपात किया-प्रवीण पाठक
Feb 13 2026
ग्वालियर। महर्षि दयानंद सरस्वती ऐसे युग पुरूष थे, जिन्होंने गुरुकुल को बढ़ावा देकर राष्ट्र को आत्मनिर्भर व समरस बनाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने स्त्री शिक्षा, विधवा पुनर्विवाह, सामाजिक समरसता के लिए काम कर समाज सुधार की नई क्रान्ति का सूत्रपात किया। यह बात पूर्व विधायक प्रवीण पाठक ने महर्षि दयानंद सरस्वती की जयंती पर आर्य समाज मंदिर मुरार में आयोजित विचार गोष्ठी एवं पुस्तक विमोचन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि कही। कार्यक्रम की अध्यक्षता जेयू के कार्यपरिषद सदस्य डॉ. रवि अंबे ने की। विशिष्ट अतिथि सर्व ब्राह्मण महासंघ के युवा जिलाध्यक्ष कपिल भार्गव थे। संरक्षक वीएम गच्छ ने उनके महान ग्रंथ सत्यार्थ प्रकाश में बताई गई समाज सुधार की जानकारियां प्रस्तुत कीं। उप प्रधान सुशीला यादव ने भजन गाए।
पूर्व विधायक पाठक ने कहा कि महर्षि दयानंद केवल आर्य समाजियों के लिए नहीं बल्कि भारतवासियों के प्रेरणा स्रोत हैं। वर्तमान में स्वामी जी के विचारों की आवश्यकता है। डॉ. रवि अंबे ने कहा कि महर्षि आधुनिक भारत के चिंतक व समाज सुधारक थे। वेदों के प्रचार प्रसार के लिए उन्होंने आर्य समाज की स्थापना की थी। कपिल भार्गव ने कहा कि महर्षि ने अस्तिक्ता से परिचित कराया। उन्होंने अपना सारा जीवन मानव कल्याण की एकता के लिए समर्पित किया। इस मौके पर नवकांत शर्मा द्वारा लिखित पुस्तक सा विद्या या विमुक्ते पुस्तक का विमोचन किया गया। अंत में प्रधान रामप्रकाश वर्मा एवं मंत्री सुरेंद्र राणा ने अतिथियों को शॉल, श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।
इस अवसर पर सुनील पटेरिया, एड. आशुतोष दुबे, विकास उपाध्याय, आर्यन शर्मा, अश्वनी अगरैया, सत्यम सिराधना, शिवम करैया, सियाराम सिंह, दयाराम यादव, परमाल सिंह राणा, रामसेवक कुशवाह, महेश यादव, सुनीता उपाध्याय, नीता शास्त्री आदि उपस्थित रहे।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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