बैंकों में हड़ताल से काम-काज प्रभावित
Feb 12 2026
ग्वालियर। नए श्रम कानूनों और सरकारी उपक्रमों के निजीकरण के आह्वान पर गुरुवार को देशभर में अखिल भारतीय हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला। बैंकिंग, आयकर, डाक, बीमा, बिजली विभाग के कर्मचारी, इंजीनियर सहित कई सरकारी और अर्द्धसरकारी संस्थानों के कर्मचारी इस आंदोलन में शामिल हुए। विभिन्न स्थानों पर कर्मचारियों ने प्रदर्शन, नारेबाजी और रैलियां निकालकर सरकार की नीतियों का विरोध दर्ज कराया।
श्रमिक संगठनों का कहना है कि सरकार द्वारा लागू किए जा रहे नए श्रम कानून मजदूरों के अधिकारों को कमजोर करते हैं और निजीकरण की नीति से सार्वजनिक क्षेत्र की नौकरियों पर खतरा बढ़ रहा है। संगठनों ने आरोप लगाया कि श्रम सुधारों के नाम पर स्थायी रोजगार कम किया जा रहा है और ठेका प्रथा को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे कर्मचारियों की, सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा प्रभावित होगी।
हड़ताल के कारण कई सरकारी सेवाओं पर आंशिक असर पड़ा। बैंक शाखाओं में कामकाज धीमा रहा, वहीं बीमा और डाक सेवाओं में भी व्यवधान की स्थिति देखी गई। कुछ क्षेत्रों में बिजली विभाग के कर्मचारियों के प्रदर्शन के कारण उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ा, हालांकि आवश्यक सेवाओं को पूरी तरह बंद नहीं किया गया। आयकर विभाग और अन्य कार्यालयों में भी कर्मचारियों की उपस्थिति कम रहने से कामकाज प्रभावित हुआ।
श्रमिक संगठनों का दावा
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे श्रमिक संगठनों ने दावा किया कि बड़ी संख्या में कर्मचारी-अधिकारी, मजदूर, किसान और हम्माल हड़ताल में शामिल हुए हैं। उनका कहना है कि यह हड़ताल केवल श्रमिकों का आंदोलन नहीं, बल्कि रोजगार सुरक्षा और सार्वजनिक क्षेत्र को बचाने की लड़ाई है। 10 केंद्रीय श्रमिक संगठनों ने इस हड़ताल को समर्थन दिया है, जिससे आंदोलन को व्यापक राष्ट्रीय स्वरूप मिला है।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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