कर्मयोगी वही होता है जो अपना कार्य पूजा समझ कर करता है-आचार्य
Feb 10 2026
ग्वालियर। कर्म योगी वही होता है जो अपना कार्य पूजा समझ कर करता है यह बात प्रोफेसर राजकुमार आचार्य कुलगुरु ने कर्म योगी प्रशिक्षण के दौरान कहीं। इस अवसर पर उन्होंने सभी को अपने कार्य ईमानदारी से करने की सलाह दी।
10 फरवरी मंगलवार को ढ्ढ-त्रह्रञ्ज कर्मयोगी पोर्टल के नोडल अधिकारी मयंक भावनानी द्वारा जीवाजी विश्वविद्यालय में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर राजकुमार आचार्य, कुलसचिव डॉ. राजीव कुमार मिश्र सहित विश्वविद्यालय के समस्त शिक्षक, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि ढ्ढ-त्रह्रञ्ज कर्मयोगी पोर्टल पर सभी शिक्षक, अधिकारी एवं कर्मचारियों का पंजीकरण अनिवार्य है। पोर्टल पर उपलब्ध विभिन्न पाठ्यक्रमों में से प्रत्येक को अपने कार्यक्षेत्र के अनुरूप कम से कम तीन कोर्स 14 फरवरी तक पूर्ण करने होंगे। इन पाठ्यक्रमों के पूर्ण होने के पश्चात प्राप्त प्रमाण-पत्र शासन को भेजे जाएंगे।
इस अवसर पर कुलगुरु प्रोफेसर राजकुमार आचार्य ने कहा कि यह कार्यक्रम सेवा, कर्तव्य एवं उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत करने का सशक्त माध्यम है। कर्मयोगी वही होता है जो अपने कार्य को पूजा समझकर पूरी निष्ठा, ईमानदारी एवं समर्पण के साथ करता है। उन्होंने कहा कि हमारा पद हमें महान नहीं बनाता, बल्कि हमारा कर्म ही हमारी वास्तविक पहचान है।
कार्यक्रम के माध्यम से विश्वविद्यालय के कार्मिकों में कार्यदक्षता, सेवा-भाव एवं उत्तरदायित्व के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया।
कार्यक्र में प्रोफ़ेसर जेएन गौतम, प्रोफ़ेसर डीसी गुप्ता, प्रोफ़ेसर एमके गुप्ता, प्रोफ़ेसर संजय कुमार गुप्ता, प्रोफ़ेसर शांति देव सिसोदिया, डॉ स्वर्णा परमार, एचके द्विवेदी, सहायक कुलसचिव कुलदीप चौहान, अमित सिसोदिया, साधना शर्मा इत्यादि आदि उपस्थित रहे।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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