भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रमुख स्रोत हैं महाकवि भवभूति के नाटक-प्रो. आचार्य
Feb 09 2026
ग्वालियर। कालिदास संस्कृत अकादमी उज्जैन, जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर तथा महाकवि भवभूति शोध एवं शिक्षा समिति, ग्वालियर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अखिल भारतीय महाकवि भवभूति समारोह के अंतर्गत राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का उद्घाटन सोमवार को प्रात: 11 बजे जीवाजी विश्वविद्यालय में सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जेयू के कुलगुरु प्रो. राजकुमार आचार्य, प्रो. आलोक शर्मा, प्रो. सुज्ञान कुमार माहान्ति सारस्वत अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा सरस्वती पूजन, महाकवि भवभूति के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन से हुआ।
प्रो. सुज्ञान कुमार माहान्ति ने भवभूति के जीवन और कृतित्व के उजले पक्षों को रेखांकित करते हुए कहा कि वे सत्यपालन में कठोर और भावाभिव्यक्ति में अत्यंत कोमल हैं। उनके नाटक समाज तक सरल और प्रभावी संदेश पहुँचाने में सक्षम हैं तथा रामायण कथा को नए कलेवर में प्रस्तुत कर उन्होंने अद्भुत काव्य-प्रतिभा का परिचय दिया।
मुख्य अतिथि प्रो. राजकुमार आचार्य ने कहा कि महाकवि भवभूति केवल कवि नहीं, बल्कि आदर्श विचारों के मूर्त रूप हैं। उनके नाटक आज भी समकालीन समस्याओं के समाधान सहज उपदेश के रूप में प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने घोषणा की कि विश्वविद्यालय परिसर में शीघ्र ही महाकवि भवभूति की प्रतिमा स्थापित की जाएगी।
अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. आलोक शर्मा ने कहा कि भवभूति के नाटक यात्रा-अवसरों पर मंचित होते रहे हैं और यह समारोह संस्कृत से जनसंपर्क तथा उसमें निहित ज्ञान के प्रति जिज्ञासा जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने नाट्य प्रस्तुतियों को बड़े मंच पर अवसर देने की आवश्यकता बताई।
इस अवसर पर कालिदास संस्कृत अकादमी की पत्रिका मालती तथा शासकीय संस्कृत महाविद्यालय की पत्रिका प्रत्यभिज्ञा का विमोचन किया गया। डॉ. विकास शुक्ल ने पुरस्कार वितरण की घोषणा की और अन्तर्विद्यालयीन, अन्तर्महाविद्यालयीन एवं अन्तर्विश्वविद्यालयीन प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया।
प्रथम शोध सत्र की अध्यक्षता प्रो. भगवतशरण शुक्ल ने की तथा संचालन डॉ. नीरज शर्मा ने किया। सत्र में लगभग 15 शोधपत्र प्रस्तुत किए गए।
संगोष्ठी में डॉ. सविता रस्तोगी, डॉ. रामकुमार शर्मा, डॉ. शिवाकांत द्विवेदी, डॉ. शांतिदेव सिसोदिया, डॉ. वनमाली विस्वाल, डॉ. मनीष खैमरिया, डॉ. कृष्णा जैन, डॉ. नरोत्तम निर्मल, डॉ. अशोक विश्नोई, श्रीराम गोपाल तिवारी, डॉ. उमंग तोमर, डॉ. काजल सक्सैना, डॉ. विष्णु नारायण तिवारी, डॉ. गिर्राज गुप्ता, अनिल बारोड आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. नौनिहाल गौतम ने किया तथा आभार प्रो. जेएन गौतम ने व्यक्त किया।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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