वर्तमान में इनोवेटिव और सस्टेनेबल बिजनेस की आवश्यकता है-प्रो.नागेश्वर राव

Feb 07 2026

ग्वालियर। आज के दौर में प्रबंधन केवल मुनाफे तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें सामाजिक उत्तरदायित्व, पर्यावरण संरक्षण एवं नैतिक मूल्यों का समावेश आवश्यक हो गया है। सतत व्यावसायिक प्रथाएं ही भविष्य की अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव बन सकती हैं। नवाचार को अपनाते हुए संस्थानों को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप समाधान विकसित करने होंगे, तभी विकास समावेशी और दीर्घकालिक होगा। वर्तमान में इनोवेटिव और सस्टेनेबल बिजनेस की आवश्यकता है।
यह बात इग्नू के पूर्व कुलगुरु प्रो.नागेश्वर राव ने शनिवार को जीवाजी विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ स्टडीज इन मैनेजमेंट द्वारा समकालीन प्रबंधन के लिए सतत व्यावसायिक प्रथाएं: नवाचारी समाधानों की खोज विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि कही। प्रो.योगेश उपाध्याय,डॉ.राजकुमार आचार्य, प्रो. राजेंद्र खटीक, डॉ.राजीव मिश्रा, डॉ.स्वर्णा परमार मंचाशीन रहे।
यह संगोष्ठी पीएम-उषा (प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान) के अंतर्गत आयोजित की जा रही है,जिसका उद्देश्य बदलते वैश्विक परिदृश्य में प्रबंधन शिक्षा को अधिक व्यवहारिक,नवाचारी एवं सतत बनाना है।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता कुलगुरु प्रो. योगेश उपाध्याय ने कहा कि समकालीन प्रबंधन में तकनीक, डेटा एनालिटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्टार्टअप संस्कृति की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि प्रबंधन शिक्षा को उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप निरंतर अपडेट करना होगा। सतत विकास के लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए नवाचारी व्यावसायिक मॉडल तैयार करना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।  इस प्रकार की संगोष्ठियां शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों को नई सोच और दृष्टिकोण प्रदान करती हैं।
कार्यक्रम के दौरान स्मारिका का विमोचन किया गया। तत्पश्चात सभी अतिथियों को शॉल श्रीफल व स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में दो तकनीकी सत्र आयोजित किए गए जिसमें देशभर से आए शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं प्रबंधन विशेषज्ञों द्वारा 20 से अधिक शोध पत्रों का वाचन किया गया।जिनमें सतत विकास, कॉर्पोरेट गवर्नेंस, हरित प्रबंधन, सामाजिक उद्यमिता एवं नवाचार जैसे विषयों पर गहन चर्चा की गई।
इस अवसर पर प्रो. डी एन गोस्वामी, प्रो.आईके पात्रो, प्रो. एके सिंह, डॉ संजीव गुप्ता, डॉ. सुशील मंडेलिया, डॉ. सतेंद्र सिकरवार, प्रो. विवेक बापट, प्रो. जेएन गौतम, प्रो. एसएन महापात्रा, प्रो. एसके सिंह, प्रो. शांतिदेव सिसौदिया, प्रो. महेंद्र गुप्ता, डॉ. मनोज शर्मा, डॉ. समीर भाग्यवंत, प्रो. डीसी गुप्ता, डॉ. नवनीत गरूड़, डॉ. पीके जैन, एच के द्विवेदी सहित शोधार्थी एवं छात्र छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रियदर्शिनी नागौरी, खुशी कुशवाह, यश टिलवानी ने किया वहीं आभार प्रो. राजेंद्र खटीक ने व्यक्त किया।