कर्म ही पूजा है और सच्चा ज्ञान भेदभाव को मिटाकर ईश्वर से जुडऩा है: विधायक डॉ. सिकरवार
Feb 01 2026
ग्वालियर। संत शिरोमणि गुरू रविदास महाराज महान भक्ति आंदोलन के संत, कवि और समाज सुधारक थे, उन्होंने कर्म को प्रधानता दी और ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ का संदेश दिया, जिसका अर्थ है कि पवित्रता हृदय में होनी चाहिए, न कि केवल तीर्थों में। संत रविदास जी हमें सिखाते है कि कर्म ही पूजा है और सच्चा ज्ञान भेदभाव को मिटाकर ईश्वर से जुडऩा है। यह विचार आज 16 ग्वालियर पूर्व से कांग्रेस विधायक डॉ. सतीश सिकरवार ने संत शिरोमणि गुरू रविदास महाराज की जयंती पर संत गुरू रविदास आश्रम थाठीपुर में आयोजित कार्यक्रम में मौजूद जनसमुदाय के समक्ष व्यक्त किये।
इस मौके पर विधायक डॉ. सिकरवार ने समाज के 101 वरिष्ठ समाजसेवियों का वस्त्र-श्रीफल भेंट कर एवं पुष्पहार पहनाकर सम्मान किया। कार्यक्रम की शुरूआत में विधायक डॉ. सतीश सिकरवार ने संत गुरू रविदास महाराज की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर नमन किया।
विधायक डॉ. सिकरवार ने कहा कि संत शिरोमणि गुरू रविदास महाराज ने समाज में फैली जात-पात और छुआछूत का कड़ा विरोध किया और समानता का संदेश दिया। मन चंगा तो कठौती में गंगा एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, जब उन्हें गंगा स्नान के लिए कहा, तो उन्होंने कहा कि यदि मन शुद्ध है, तो गंगा उनके काम करने वाले पात्र (कठौती) में ही हैं। विधायक डॉ. सिकरवार ने कहा कि संत रविदास महाराज के लिये ईश्वर निराकार और हर इंसान के हृदय में बसते थे। उन्होंने राम, कृष्ण, गोविंद जैसे नामों से ईश्वर को याद किया। संत रविदास महाराज के पदों को सिख धर्म के पवित्र ग्रंथ, गुरु ग्रंथ साहिब में शामिल किया गया है।
कार्यक्रम में एमआईसी मेम्बर एवं पार्षद श्रीमती गायत्री सुधीर मण्डेलिया, राकेश अग्रवाल, रामअवतार जाटव, गोपाल सिंह चैधरी, डॉ. लालसिंह उच्चोडिया, श्रीमती रेखा जाटव, संदीप यादव, सूरतराम सैनी, ओंकार सरपंच, प्रीतम सिंह सनाढ्य, लक्ष्मण सिंह बैनर्जी, सुनील रमपुरिया, सतेन्द्र नागर, सुनील चंद्रवंशी, लाखन सिंह राजे, देवचन्द मास्टर, आशाराम चैकोटिया सहित क्षेत्रीय नागरिक मौजूद रहे।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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