माघ पूर्णिमा संगम स्नान 1 फरवरी रवि पुष्यमृत योग में विशेष शुभ:ज्योतिषाचार्य जैन
Jan 28 2026
ग्वालियर। यू तो हर समय गंगा ,यमुना,सरस्वती नदियों के संगम पर स्नान दान हर रोज ही पाप को नष्ट कर पुण्यको बढ़ाता है किंतु माघ माह की पूर्णिमा का स्नान धार्मिक एवं पौराणिक दृष्टि से विशेष महत्व का है। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने बताया कि माघ पूर्णिमा पर इस वार रवि पुष्यमृत योग 1 फरवरी रविवार को सूर्योदय से रात्रि 11:57 बजे तक रहेगा। यह सन 2026 का पहला रवि पुष्यमृत योग है जो सूर्योदय से लगातार लगभग 17 घंटे माघ पूर्णिमा के साथ रहेगा। आगे 1 नवंबर 2026 को भी रवि पुष्यमृत योग की अवधि 22 घंटे की रहेगी।
जैन ने कहा 1 फरवरी रविवार माघ पूर्णिमा पूरी तिथि सुबह 5:52 बजे से शुरू होकर 2 फरवरी की रात 3:28 बजे तक चलेगी। इसलिए उदयातिथि मान से पूर्णिमा तिथि पूरे दिन मान्य रहेगी। इसलिए 1 फरवरी रविवार को ही रविपुष्यमृत योग के साथ पूजा/स्नान/दान आदि के लिए विशेष पुण्य फलदाई है।
माघ पूर्णिमा का महत्व
यह माघ महीने की अंतिम पूर्णिमा होती है और संगम स्नान-दान का विशेष महत्व इस दिन होता है। पवित्र नदियों जैसे गंगा, यमुना,सरस्वती के संगम तट पर स्नान करने से पापों से मुक्ति, पितृ दोष , कालसर्प दोष शांति मिलने और आत्मिक शुद्धि की मान्यता है। इस दिन दान, पूजा, जाप, हवन आदि करने से विशेष धार्मिक लाभ मिलता है।
स्नान के लिए विशेष मुहूर्त
स्नान, दान, हवन,धार्मिक कार्य के लिए इस दिन सुबह जल्दी पवित्र नदियों में स्नान करने का श्रेष्ठ मुहूर्त इस वार तडक़े 5 बजे से रविपुष्यमृत योग में पूरे दिन चलेगा।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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