होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया ने ग्वालियर में युवा नागरिकों को रोड सेफ्टी लर्निंग से जोड़ा
Jan 23 2026
ग्वालियर। होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया (एचएमएसआई) ने मप्र के ग्वालियर में रोड सेफ्टी अवेयरनेस कैंपेन के माध्यम से अपनी राष्ट्रीय पहल को जारी रखा। इस अभियान में वेंडी स्कूल जूनियर कॉलेज और सेंट्रल अकादमी स्कूल के 2400 से अधिक छात्र शामिल हुए, जहाँ सडक़ सुरक्षा पर सीखने, बातचीत और साझा जिम्मेदारी को बढ़ावा दिया गया।
अभियान का फोकस संरचित सत्रों के माध्यम से सडक़ पर सही व्यवहार की व्यावहारिक समझ विकसित करने पर रहा। इन सत्रों में प्रतिभागियों को सुरक्षित राइडिंग के बुनियादी नियमों, ट्रैफिक अनुशासन के महत्व और रोज़मर्रा की यात्रा में जागरूकता की भूमिका से परिचित कराया गया। सत्रों के दौरान प्रतिभागियों को यह समझने के लिए प्रेरित किया गया कि सडक़ सुरक्षा केवल नियमों का पालन नहीं है, बल्कि एक रोज़ की आदत है, जो व्यक्तिगत और सामूहिक भलाई को प्रभावित करती है।
कार्यक्रम में इंटरएक्टिव लर्निंग फॉर्मैट्स शामिल किए गए, जिससे प्रतिभागी सडक़ सुरक्षा से जुड़े विषयों को सक्रिय रूप से समझ सकें। सेफ्टी राइडिंग थ्योरी सत्र इस अभियान का आधार रहे, जिनके माध्यम से प्रतिभागियों को अहम संदेशों को आसान और सहज तरीके से समझने का अवसर मिला।
क्षेत्र में दोपहिया वाहन रोज़मर्रा के परिवहन का अहम हिस्सा होने के कारण, इस पहल का उद्देश्य वर्तमान और भविष्य के सडक़ उपयोगकर्ताओं के बीच जिम्मेदार और समझदारीपूर्ण व्यवहार को बढ़ावा देना था। अभियान के दौरान दैनिक जीवन में सामने आने वाली आम सडक़ परिस्थितियों पर चर्चा की गई, जिससे प्रतिभागी सीख को वास्तविक जीवन की स्थितियों से जोड़ सकें।
अपने वैश्विक सुरक्षा संदेश‘सेफ्टी फॉर एवरीवन’से प्रेरित होकर, होंडा ऐसे भविष्य के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है जहाँ मोबिलिटी और सुरक्षा साथ-साथ चलें। शिक्षा और शुरुआती स्तर पर संवेदनशीलता के माध्यम से, होंडा कम उम्र से ही सडक़ सुरक्षा की समझ विकसित करने का प्रयास करता है, ताकि सुरक्षित व्यवहार एक सोच-समझकर किया गया प्रयास नहीं बल्कि स्वाभाविक आदत बन सके।
2021 में होंडा ने वर्ष 2050 के लिए अपना वैश्विक विजऩ स्टेटमेंट जारी किया, जिसमें उसने होंडा के दोपहिया और चारपहिया वाहनों से जुड़े सडक़ हादसों मेंशून्य मृत्यु दरप्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया।भारत मेंएचएमएसआईइस विजऩ के अनुरूप कार्य कर रहा है और भारत सरकार के उस दिशा-निर्देश के साथ भी कदम मिला रहा है, जिसके तहत 2030 तक सडक़ हादसों में मृत्यु दर को आधा करनेका लक्ष्य तय किया गया है।
इस लक्ष्य को हासिल करने का एक अहम पहलू यह है कि 2030 तक बच्चों में सडक़ सुरक्षा के प्रति सकारात्मक सोच विकसित की जाएऔर उसके बाद भी उन्हें निरंतर शिक्षित किया जाए।स्कूलों और कॉलेजों में दी जाने वाली सडक़ सुरक्षा शिक्षा का उद्देश्य केवल जागरूकता फैलाना नहीं है, बल्कि युवाओं के मन मेंसुरक्षा की संस्कृतिको विकसित करना है, ताकि वे भविष्य मेंसडक़ सुरक्षा के सशक्त प्रतिनिधिबन सकें।यह शिक्षा आने वाली पीढिय़ों को जि़म्मेदार नागरिक बनने के लिए सशक्त बनाती है और उन्हें एकसुरक्षित समाज के निर्माण में सक्रिय योगदानदेने के लिए प्रेरित करती है।
एचएमएसआईका उद्देश्य है कि वह ऐसी कंपनी बनेजिसके अस्तित्व की समाज को आवश्यकता महसूस हो। इस दिशा में एचएमएसआई सडक़ सुरक्षा जागरूकता को समाज के हर वर्ग तक पहुँचाने पर विशेष ध्यान दे रहा है।स्कूल के बच्चों से लेकर कॉर्पोरेट्स और व्यापक समाज तक हर वर्ग के लिए एचएमएसआईविशेष और अनोखी पहलेंतैयार कर रहा है, ताकि हर व्यक्ति को उसकी ज़रूरत और समझ के अनुसार सडक़ सुरक्षा की जानकारी दी जा सके।यह समावेशी दृष्टिकोण एचएमएसआई को एक जि़म्मेदार और समाज-केंद्रित संगठन के रूप में स्थापित करता है।
एचएमएसआईके प्रशिक्षित सडक़ सुरक्षा प्रशिक्षक देशभर में फैले 10 ट्रैफिक ट्रेनिंग पार्क (टीटीपी) और 6 सेफ्टी ड्राइविंग एजुकेशन सेंटर्स (एसडीईसी) में रोज़ाना कार्यक्रम आयोजित करते हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य सडक़ सुरक्षा शिक्षा को समाज के हर वर्ग तक पहुँचाना है। अब तक यह पहल 10 मिलियन से अधिक भारतीयों तक पहुँच चुकी है। एचएमएसआई का राष्ट्रीय सडक़ सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम सीखने की प्रक्रिया को रोचक और वैज्ञानिक बनाने पर केंद्रित है। इसके तहत वर्चुअल राइडिंग सिमुलेटर, इंटरैक्टिव गेम्स और खतरे की पहचान पर आधारित प्रशिक्षण जैसे आधुनिक तरीकों का उपयोग किया जाता है, जिससे प्रतिभागियों को व्यावहारिक और प्रभावशाली अनुभव प्राप्त होता है। यह समग्र दृष्टिकोण सडक़ सुरक्षा को व्यवहार में लाने और समाज में जिम्मेदार यातायात संस्कृति को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
वैज्ञानिक रूप से तैयार किया गया शिक्षण मॉड्यूल:होंडा के दक्ष प्रशिक्षक सडक़ सुरक्षा की मजबूत नींव रखने के लिए थ्योरी सत्रों के माध्यम से प्रशिक्षण की शुरुआत करते हैं। इन सत्रों में प्रतिभागियों कोसडक़ संकेत और चिन्हों की जानकारी, सडक़ पर चालक की जिम्मेदारियाँ, सुरक्षित सवारी के लिए उपयुक्त गियर और बैठने की मुद्रा, तथासुरक्षित और शिष्ट सवारी व्यवहारजैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से समझाया जाता है।यह संरचित और वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रतिभागियों को न केवल जागरूक बनाता है, बल्कि उन्हें जिम्मेदार और सतर्क यात्री बनने के लिए प्रेरित भी करता है।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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