संगठित हिंदू समाज राष्ट्र व विश्व के लिए कल्याणकारी-कुमार संजीव

Jan 18 2026

ग्वालियर। संगठित हिंदू समाज राष्ट्र के लिए ही नहीं, बल्कि विश्व के लिए भी कल्याणकारी होगा। इसलिए हिंदू समाज एकजुट होकर अपने कर्तव्य का पालन करते हुए सर्वे भवंतु सुखिर्न को साकार करने के लिए प्राण प्रण से जुट जाएं।
यह बात मध्य भारतीय हिंदी साहित्य सभा के अध्यक्ष डॉ.कुमार संजीव ने कंपू स्थित बरार समाज के सामुदायिक भवन में आयोजित हिंदू सम्मेलन में मुख्य वक्ता की आसंदी से कही। सकल हिंदू समाज के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लाल टिपारा गौशाला के संत ऋषभदेवानंद महाराज थे। विशेष अतिथि साधना पुरोहित रहीं। इस अवसर पर कार्यक्रम संयोजक डॉ.किशोरी लाल राजौरिया भी मंचासीन रहे।
डॉ. कुमार संजीव ने कहा कि डॉ.केशव बलिराम हेडगेवार ने हिंदू समाज की तत्कालीन विषम परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए हिंदुओं को संगठित करने की दूरदर्शी योजना बनाई थी। उनका उद्देश्य था हिंदू समाज में अपने अस्तित्व, अस्मिता और मानबिदुओं के प्रति गर्व एवं स्वाभिमान जाग्रत हो।
उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा भी था जब हिंदू होना उपहास का विषय माना जाता था। उस कालखंड में समाज में यह धारणा प्रचलित थी कि चार हिंदू तभी एकत्र होते हैं जब किसी को श्मशान ले जाना हो या आप चार मेंढकों को तौल सकते हैं, लेकिन चार हिंदुओं को एक साथ नहीं बिठाल सकते। ऐसे कठिन समय में डॉ.हेडगेवार द्वारा देखा गया संगठित हिंदू समाज का स्वप्न कोई दिवास्वप्न नहीं था, बल्कि दृढ़ संकल्प का परिणाम था। आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष का सुअवसर हम सबके जीवन में आया है और स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि भारत माता पुन: वैभव की ओर क्रमश: अग्रसर है। समाज जीवन का हर क्षेत्र आज संघ के कार्यों से आलोकित हो रहा है। संघ व्यक्ति निर्माण की पाठशाला से शुरू होकर समाज जागरण और वैश्विक कल्याण हेतु अपने चरित्रवान कार्यकर्ताओं के माध्यम से निरंतर कार्य कर रहा है।
सम्मेलन में अन्य वक्ताओं ने भी पंच परिवर्तन-सामाजिक समरसता, स्व बोध, पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन एवं नागरिक कर्तव्य को आत्मसात करने का आह्वान किया।