कांग्रेस ने तीन बार बदला मनरेगा का नाम, अब हंगामा क्यों: प्रभारी मंत्री

Jan 12 2026

ग्वालियर। 1980 में शुरू हुई मनरेगा का कांग्रेस के शासन काल में तीन बार नाम बदला गया है, 1980 में इंदिरा गांधी ने सभी पुरानी रोजगार योजनाओं को मिला कर राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम योजना का नाम दिया। इसका राजीव गांधी ने नाम बदलकर जवाहर रोजगार योजना का नाम दे दिया। इसके बाद 2004 में सोनिया-मनमोहन सरकार ने इसे बदलकर नरेगा नाम दे दिया। इसके बाद 2005 में फिर से इसका नाम बदला गया और इसका नाम मनरेगा कर दिया। इस योजना में कई विसंगतियां थीं, जिसे ठीक कर भाजपा ने इसका नाम व्हीबी, जी राम जी दिया। कांग्रेस इसका तीन बार पहले ही नाम बदल चुकी है, अब वह भाजपा पर आरोप लगा रही है। मनरेगा में कांग्रेस ने 3.21 लाख करोड़ रुपये खर्च किए, जबकि मोदी सरकार में इस पर 8.53 लाख करोड़ रुपए खर्च किए हैं। यह बात पत्रकारों से चर्चा करते हुए प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट ने कही।
पत्रकारों से चर्चा करते हुए प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट ने कहाकि विकसित भारत 2047 के विजन के साथ अनुरूप ग्रामीण विकास का नया ढांचा तैयार किया जा रहा है। इसके लिए केंद्र सरकार यह पूरा बिल महात्मा गांधी की भावना के अनुरूप है और राम राज्य की स्थापना के लिए लाया जा रहा है। उन्होंने कहाकि आखिर कांग्रेस और इंडी गठबंधन को विकसित भारत और भगवान राम के नाम से इतनी नफरत क्यों है। नई योजना में काम के दिन ज्यादा होंगे तो साथ ही मजदूरों को पारिश्रमिक भी जल्दी मिलेगा। हर ग्रामीण परिवार को हर साल 125 दिन के रोजगार की गारंटी मिलेगी। वन क्षेत्र में काम करने वाले कामगारों को 25 दिन का रोजगार और अधिक मिलेगा। मनरेगा पर सबसे अधिक खर्च मोदी सरकार ने किया है। मनरेगा पर अब तक 11.74 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए, जिसमें मोदी सरकार ने 8.53 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं।