नगर कीर्तन में सेवा और अनुशासन की पेश की मिसाल
Jan 05 2026
ग्वालियर। गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाश पर्व पर शहर में चल रहे धार्मिक कार्यक्रमों का समापन सोमवार को श्रद्धा, सेवा और भक्ति भाव के साथ हुआ। गुरुद्वारा नानकदेव फूलबाग में सुबह से ही संगत की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। वातावरण वाहेगुरु के जयकारों और कीर्तन की मधुर स्वर लहरियों से भक्तिमय बना रहा।
प्रकाश पर्व के अंतिम दिन सोमवार सुबह 8 बजे अखंड पाठ साहिब का विधिवत भोग लगाया गया। इस दौरान गुरुद्वारा परिसर में संगत ने गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष मत्था टेककर सुख-शांति की कामना की। भोग के पश्चात गुरु का अटूट लंगर भी प्रारंभ हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक गुरुद्वारा परिसर में भव्य कीर्तन दरबार सजाया गया। रागी जत्थों ने गुरु गोबिंद सिंह जी के जीवन, बलिदान और खालसा पंथ की महिमा का गुणगान किया। कीर्तन के माध्यम से गुरु साहिब के संदेश-सेवा, त्याग, साहस और समानता को संगत तक पहुंचाया गया। कीर्तन दरबार के दौरान पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।
इसी क्रम में सोमवार दोपहर 3 बजे गुरुद्वारा नानकदेव फूलबाग से भव्य नगर कीर्तन का शुभारंभ हुआ। नगर कीर्तन फूलबाग गुरुद्वारा से प्रारंभ होकर महलगेट, जयेंदगंज, ऊंटपुल, दौलतगंज, महाराज बाड़ा, सराफा, डीडवाना ओली, गश्त का ताजिया, राम मंदिर, फालका बाजार, शिंदे की छावनी सहित विभिन्न क्षेत्रों से होता हुआ पुन: गुरुद्वारा फूलबाग पहुंचा।
नगर कीर्तन में सबसे आगे पानी के टैंकर द्वारा मार्ग पर छिडक़ाव किया गया। इसके पीछे सिख समाज की महिलाएं, पुरुष और बच्चे पंच प्यारों तथा गुरु ग्रंथ साहिब की पालकी के आगे रास्ते की सफाई करते हुए सेवा में जुटे रहे। यह दृश्य सिख धर्म की सेवा, अनुशासन और समर्पण की भावना को दर्शाता रहा।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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