प्रभु की कथा सुनना ही वास्तविक सफलता है: संत रामचंद्र दास

Dec 30 2025

ग्वालियर। सिद्धपीठ गंगादास की शाला में पीठाधीश्वर स्वामी रामसेवकदास महाराज के सानिध्य में शरद ऋतु पर श्रीमद् भागवत कथा में संत रामचन्द्र दास महाराज ने श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन की कथा में बताया कि जब दैत्य हिरण्याक्ष ने पृथ्वी को चुराकर समुद्र की गहराइयों (रसातल) में छिपा दिया, तब भगवान विष्णु ने वराह (सूअर) का रूप धारण किया।
भगवान वराह ने हिरण्याक्ष का वध किया और पृथ्वी को अपने दांतों पर उठाकर पुन: स्थापित किया। यह कथा हमें सिखाती है कि जब-जब धर्म की हानि होती है और प्रकृति संकट में होती है, भगवान अवतार लेकर संतुलन बनाते हैं। उन्होंने कहा, ब्रह्मा जी के मानस पुत्र कर्दम ऋषि ने कठिन तपस्या की। भगवान की आज्ञा से उनका विवाह स्वयंभू मनु की पुत्री देवहूति से हुआ। देवहूति के यहां नौ पुत्रियों और अंत में स्वयं भगवान ने कपिल मुनि के रूप में अवतार लिया।
उन्होंने बताया कि राम से बड़ा राम का नाम है। प्रभु के नाम श्रवण से जीवन की हर व्यथा मिट जाती है। प्रभु की कथा सुनना ही वास्तविक सफलता है। कथा सुनने और कराने से हमारे पितरों को तृप्ति प्राप्त होती है और वो प्रसन्न होते हैं। जिस कारण हमारे जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि निरंतर बनीं रहती है।