डॉ. राजरानी शर्मा की चार कृतियों का लोकार्पण हुआ

Dec 30 2025

ग्वालियर। पटेल नगर ग्वालियर स्थित एक निजी होटल में डॉ राजमणि शर्मा की चार कृतियों ब्रजरस बरसै, शब्द रास, पुष्टि प्रसाद ( काव्य संग्रह) आखर आखर मोर पंख (ललित निबंध संग्रह) का लोकार्पण सहित कृतियों का संवाद समारोह सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता गोविंद प्रसाद शर्मा ने की। मुख्य अतिथि  डॉ कुमार संजीव, विशिष्ट अतिथि डॉ स्मिता सहस्त्रबुद्धे  एवं सुमन शर्मा, डॉ पद्मा शर्मा, डॉ करुणा सक्सेना, डॉ मंदाकिनी शर्मा एवं राज किशोर वाजपेयी अभय मंचासीन रहे। कार्यक्रम का संचालन व्याप्ति उमड़ेकर ने किया।
सबसे पहले डॉक्टर श्रद्धा सक्सेना ने पुस्तक पर ब्रजरस बरसै की चर्चा के साथ डॉ राजधानी शर्मा के द्वारा 25 शोधार्थियों को एचडी एवं 85 शोध आलेखौ का एवं लोक भाषा पर अनेक लेख प्रकाशन की चर्चा की, उन्होंने कहा कि डॉ राजरानी शर्मा के द्वारा लिखित आलेख दूरदर्शन एवं आकाशवाणी से प्रसारित किए गए अनेक सम्मानों के विभूषणों से संबंधित उनके साहित्य में उपादेयता का उल्लेख किया।
डॉक्टर मंदाकिनी शर्मा ने आखर आखर मोर पंख पर कहा, कि इस कृति में 19 ललित निबंध है, जो 12 ज्योतिर्लिंग एवं 84 के आंकड़े सहित शिवतत्व की त्रिगुणात्मक सत्ता का अवलोकन होता है। डॉक्टर करुणा सक्सेना ने कृति ब्रज रस बरसे पर कहा ब्रिज की भूमि में कृष्ण रास का अलंकृत भाव बोध से ओतप्रोत है। डॉक्टर पद्मा शर्मा ने शब्द रास पर अपनी समीक्षात्मक अभिव्यक्ति देते हुए कहा कि, रास शब्द रस से बना हुआ है,और शब्द रास भावों से परिपूर्ण है। यह पुस्तक बहुत ही उत्कृष्ट एवं ज्ञानवर्धक है।
राजकिशोर वाजपेई ने आखर आखर मोर पंख पर पुष्टि मार्ग से पुष्टिमार्ग तक की यात्रा का वर्णन करते हुए कहा कि 56 भोग भगवान श्रीकृष्ण के द्वारा इंद्र के प्रकोप से अति वर्षा के कारण 8 दिन तक भोजन न करने के कारण सात प्रकार के भोज्य पदार्थ का गुणात्मक योग 56 से होना बताया है। जो मथुरा के भक्तों द्वारा श्रीकृष्ण को खिलाया गया। पुस्तक में कृष्ण के द्वारा विभिन्न कलाओं का स्पष्ट वर्णन है। 
कुलगुरू स्मिता सहस्त्रबुद्धे ने डॉ राजरानी शर्मा के साहित्यिक अवदान पर उल्लेख करते हुए उनके सहयोग की प्रशंसा की। विशिष्ट अतिथि सुमन शर्मा के द्वारा भी उनके संस्कारी भाव व लेखन में बहुत ही सराहनीय योगदान के लिए उनके डॉक्टर राजरानी शर्मा की प्रशंसा की।
 इसके पश्चात अध्यक्ष के रूप में गोविंद प्रसाद शर्मा के द्वारा कहा, कि आखर आखर मोर पंख एवं ललित निबंध लेख में इनकी लेखनी बहुत ही सक्षम है ,विचार अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। रचना के परीक्षण पर भाव उत्कृष्ट एवं प्रेरक हैं। डॉ राजरानी शर्मा का लेखन अत्यंत प्रभावी है। इस अवसर पर डॉ राज रानी शर्मा द्वारा भी अपनी खुशियों पर समग्र रूप से परिजन वरिष्टचन एवं मार्गदर्शकों का आभार व्यक्त किया। इसके पश्चात डॉ राज रानी शर्मा द्वारा साहित्यिक सहयोग के लिए रामचरण "रुचिर" प्रचार मंत्री, मध्य भारतीय हिंन्दी साहित्य सभा को शॉल एवं पुस्तक भेंट कर सम्मान किया गया।
इस अवसर पर डॉ. लोकेश तिवारी, डॉ. वंदना कुशवाह, सीता चौहान, सरिता चौहान, डॉ. ज्योति उपाध्याय, डॉ. किंकरपाल जादौन, अनंगपाल सिंह भदोरिया, रामलखन शर्मा, आरती अक्षत, राजेश अवस्थी, उमा उपाध्याय, कविता उपाध्याय, राम मिश्रा, डॉ अंशुमान शर्मा सहित राजारानी के परिजन उपस्थित रहे।