बैंक से सांठगांठ कर फ्रॉड करने के लिए अकाउंट खुलवाने वाले 6 आरोपी पकड़े

Dec 24 2025

ग्वालियर। क्राइम ब्रांच ने साइबर फ्रॉड में उपयोग होने वाले म्यूल बैंक अकाउंट रैकेट का खुलासा किया है। नया बाजार स्थित महाकाल एमपी ऑनलाइन शॉप के संचालक इस रैकेट का मुख्य सूत्रधार थे। आरोपी बैंक से सांठगांठ कर म्यूल अकाउंट खोलता था और हर अकाउंट के बदले उसे 1 हजार रुपए कमीशन मिलता था। देश में साइबर फ्रॉड की राशि को अलग-अलग खाते में ट्रांसफर करने के लिए ऐसे म्यूल अकाउंट की आवश्यकता होती है।
क्राइम ब्रांच ने एमपी ऑनलाइन के संचालक समेत 6 आरोपियों को पकड़ा है। जिन लोगों के दस्तावेज पर म्यूल अकाउंट खोले जाते थे, उन्हें 5 हजार रुपए महीना किराया मिलता था। क्राइम ब्रांच ने मामले का खुलासा बुधवार को किया गया।
एसएसपी धर्मवीर सिंह को सूचना मिली थी कि देश में डिजिटल फ्रॉड और अन्य साइबर अपराध में ठगे गए रुपए निकालने के लिए म्यूल बैंक अकाउंट का उपयोग किया जाता है। इनमें अधिकतर खाते ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के थे।
एसएसपी सिंह ने क्राइम ब्रांच निरीक्षक धर्मेंद्र सिंह कुशवाह को इस मामले की जांच के लिए लगाया। जांच के दौरान यह पता चला कि नया बाजार में महाकाल एमपी ऑनलाइन शॉप के संचालक नरेन्द्र सिंह सिकरवार इस रैकेट में शामिल थे।
पूछताछ में पता चला कि अकाउंट खोलने के लिए अजय परिहार और बृजेश रजक कस्टमर लेकर आते थे। इसके बाद क्राइम ब्रांच ने इस मामले में नरेन्द्र सिंह सिकरवार निवासी कंपू, अजय परिहार निवासी नाका चन्द्रवदनी, बृजेश रजक नाका चन्द्रवदनी, निवासी नकुल परिहार झांसी रोड, नीकेश साहू  निवासी आमखो कंपू, परमाल सिंह पाल निवासी दर्पण कॉलोनी थाटीपुर आदि को पकड़ा है।
महाकाल एमपी ऑनलाइन शॉप की तलाशी के दौरान 80 अलग-अलग बैंक के एटीएम कार्ड मिले। इनमें 74 फिनो बैंक, और एक-एक एसबीआई, यूनियन बैंक, कोटक बैंक, एनएसडीएल, पंजाब एंड सिंध बैंक के कार्ड शामिल थे। इन खातों की जांच टोल-फ्री नंबर 1930 साइबर क्राइम पोर्टल पर भी की गई, जिसमें अधिकांश खातों को साइबर फ्रॉड में उपयोग के लिए रिपोर्टेड पाया गया।
पूछताछ में पता चला कि म्यूल अकाउंट खोलने पर एमपी ऑनलाइन शॉप संचालक नरेन्द्र सिंह सिकरवार को 1 हजार रुपए प्रति खाता मिलते थे। वहीं, अकाउंट खुलवाने वाले अजय और बृजेश अकाउंट धारक को 5 हजार रुपए महीना किराया देते थे।
जांच में पता चला कि महाकाल एमपी ऑनलाइन शॉप पर पिछले तीन महीने से यह रैकेट चल रहा था। पुलिस ने रजिस्टर, डाटा एंट्री चेक रजिस्टर, कंप्यूटर और लैपटॉप जब्त कर पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।
इस मामले में एसएसपी  धर्मवीर सिंह ने बताया कि म्यूल बैंक अकाउंट रैकेट का खुलासा क्राइम ब्रांच ने किया है। 6 आरोपियों को पकड़ा है और जांच अभी जारी है। आगे और भी आरोपी पकड़े जाने की उम्मीद है।
क्या है म्यूल अकाउंट
साइबर फ्रॉड के दौरान ठग अलग-अलग बैंक अकाउंट में राशि ट्रांसफर कर निकालते हैं। ऐसे खाते गरीब या जरूरतमंद लोगों के दस्तावेज़ पर खोले जाते हैं। अकाउंट उनके नाम पर होता है, लेकिन एटीएम कार्ड, चेक बुक और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर ठगों के पास रहते हैं। इसके बदले अकाउंट होल्डर को 5-6 हजार रुपए महीना किराया मिलता है।