हरिकथा, मिलाद, शहनाई वादन और चादरपोशी के साथ तानसेन समारोह शुरू
Dec 15 2025
ग्वालियर। संगीत का महाकुंभ तानसेन समारोह पारंपरिक ढंग से शुरू हो गया है। सोमवार सुबह समारोह में हरिकथा, मिलाद, शहनाई वादन और चादरपोशी की गई। तानसेन समारोह अपने आप में साम्प्रदायिक सद्भाव की मिसाल है। यहां सभी धर्मों के सदस्य एक साथ प्रस्तुति देकर कार्यक्रम का श्रीगणेश करते हैं।
यह समारोह 15 दिसंबर से 19 दिसंबर तक चलेगा। इस साल 101वां आयोजन हो रहा है। हालांकि, समारोह का औपचारिक शुभारंभ सोमवार शाम हजीरा स्थित तानसेन समाधि परिसर में होगा। समारोह स्थल पर ऐतिहासिक चतुर्भुज मंदिर की थीम पर भव्य मंच बनाया गया है। इसी मंच पर देश और दुनिया के ब्रह्मनाद के शीर्षस्थ साधक, सुर सम्राट तानसेन को स्वरांजलि अर्पित करेंगे।
संस्कृति विभाग के संचालक एमके नामदेव ने बताया कि तानसेन समारोह परंपरा का जीवंत उदाहरण है। इसमें सभी धर्मों के गुरु एक साथ बैठकर पारंपरिक शुभारंभ करते हैं। इससे संगीत के माध्यम से दुनिया को एक सकारात्मक संदेश भी जाता है।
इस बार आयोजन में स्थानीय कलाकारों को अपने हुनर दिखाने का ज्यादा से ज्यादा मौका देने का प्रयास किया गया है। अगले कुछ दिनों तक ग्वालियर की धरती संगीत का महाकुंभ बनने जा रहा है।
ढोलीबुआ महाराज ने गाया भजन बिन तीनों पन बिगड़े
सोमवार सुबह तानसेन समाधि स्थल पर उस्ताद मजीद खां और साथियों ने रागमय शहनाई वादन किया। इसके बाद ढोलीबुआ महाराज, नाथपंथी संत, ने संगीतमय आध्यात्मिक प्रवचन दिए। उनका संदेश था कि परहित से बड़ा कोई धर्म नहीं। उन्होंने कहा, अल्लाह और ईश्वर, राम और रहीम, कृष्ण और करीम, खुदा और देव सब एक हैं। हर मनुष्य में ईश्वर विद्यमान है।
प्रवचन के बाद हरि मिलाद कथा के साथ तानसेन समारोह के शुभारंभ पर तानसेन के मकबरे पर चादरपोशी की गई। इसके बाद कब्बाली का आयोजन किया गया।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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