आत्मा के मूल गुण शांति, प्रेम, पवित्रता और आनंद हैं-बीके अर्चना
Nov 29 2025
ग्वालियर। सिकंदर कम्पू स्थित पानी की टंकी के पास सात दिवसीय ज्ञान सप्ताह का आयोजन एडव्होकेट महेश शिहारे के द्वारा किया गया। जिसमें प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय सीधी से प्रवचन हेतु बीके अर्चना बहन को मुख्य रूप से आमंत्रित किया गया। इस अवसर पर ग्वालियर ब्रह्माकुमारीज लश्कर केन्द्र प्रमुख बीके आदर्श दीदी भी उपस्थित रहीं।
ब्रह्मा कुमारी अर्चना बहन ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि सृष्टि एक रंग मंच है और हम सभी अभिनय कर्ता समय अंतराल में अलग अलग नाम और रूप से आत्मा इस सृष्टि पर शरीर धारण करती है और छोड़ती है। यह प्रकिया अनवरत रूप से चलती है। आत्मा अजर है, अमर है, अविनाशी है, जबकि शरीर बदलता रहता है। इसलिए जीवन में सुख और शांति की अनुभूति करना है तो आत्मा समझकर हर कर्म करो क्योकि आत्मा को एक शांत, पवित्र और शक्तिशाली चमकती हुई प्रकाशस्वरूप बिंदु माना जाता है, जो शरीर से पूर्णत: अलग होती है।
यह मैं का सच्चा स्वरूप है, जिसमें मन, बुद्धि और संस्कार निवास करते हैं, जो सोचने, समझने और कर्म करने की क्षमता प्रदान करते हैं। आत्मा के मूल गुण शांति, प्रेम, पवित्रता और आनंद हैं, यदि हम आत्मस्मृति में रहते है तो इन गुणों की अनुभूति स्वत: होने लगती है।
आत्मा जन्म-मृत्यु के चक्र में बंधी रहती है और शरीर के माध्यम से सुख-दुख अनुभव करती है, परंतु अलग-अलग शरीर धारण करने का कारण वह अपनी वास्तविक पहचान भूल जाती है। इसलिए ही जीवन में दुख अशांति आती है।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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