कला, संगीत और पुरातत्व का गहरा संबंध है- कुलगुरु प्रो. सहस्त्रबुद्धे

Nov 27 2025

ग्वालियर। विश्व धरोहर सप्ताह के समापन पर जीवाजी विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग द्वारा अद्वितीय छायाचित्र प्रदर्शनी लगाई गई। इस प्रदर्शनी में शहर के शैलचित्रों, मंदिरों, स्मारकों, स्थापत्य और वास्तुकला को एक नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया, जहां दर्शकों को अपनी ही मिट्टी की गौरवशाली पहचान से जुडऩे का मौका मिला। 
मुख्य अतिथि राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो. स्मिता सहस्त्रबुद्धे ने उद्घाटन किया। अध्यक्षता विभागाध्यक्ष डॉ. शांतिदेव सिसोदिया ने की। विशिष्ट अतिथि जेयू के कुलसचिव प्रो. राकेश कुशवाह थे। 
मुख्य अतिथि प्रो. सहस्त्रबुद्धे ने कहा, कला, संगीत और पुरातत्व का गहरा संबंध है और यह सभी एक दूसरे के पूरक हैं। साथ ही प्राचीन कलाकृतियां हमारी पहचान और प्रेरणा का स्रोत हैं। कुलसचिव डॉ. राकेश कुशवाह ने विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और प्रशासनिक सहयोग को रेखांकित किया। डॉ. शांतिदेव सिसौदिया ने कहा, शैलचित्र मानव सभ्यता के प्रारंभिक कलात्मक अभिव्यक्तियों में से एक हैं। इन चित्रों के माध्यम से प्राचीन जीवनशैली, विश्वासों और कलात्मक कौशल की झलक मिलती है। वहीं ग्वालियर के मंदिर और स्मारक विभिन्न कालों की स्थापत्य कला के उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। यह संरचनाएं न केवल धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व रखती हैं, बल्कि कलात्मक सूक्ष्मताओं और इंजीनियरिंग कौशल का भी प्रदर्शन करती हैं। 
विभागाध्यक्ष प्रो. शांतिदेव सिसोदिया ने बताया कि इस अवसर पर रामश्री के साथ अन्य दो स्कूल के छात्र छात्राएं प्रदर्शनी का अवलोकन करने पहुंचे। उन्होंने तस्वीरों के माध्यम से ग्वालियर के ऐतिहासिक काल के महत्व को समझा और अपनी विरासत के प्रति एक प्रारंभिक समझ विकसित की। उनके चेहरे पर कौतूहल और सीखने की ललक स्पष्ट दिख रही थी।
इस प्रदर्शनी में विभाग के वह शोधार्थी भी मौजूद रहे, जो इस क्षेत्र की धरोहर पर गहन शोधकार्य कर रहे हैं। इनमें वैशाली गुर्जर, राहुल कुमार, प्रिया सुमन, पूर्णिमा यादव, वैभव शर्मा, डॉ. अमिता खरे, राहुल बरैया, राजकुमार गोखले, सामिन खान के साथ अनामिका, आंचल, केतन चतुर्वेदी, अंजली, अनन्या बटोल, अभिषेक, लवान्या, ज्योति, श्वेता, सचिन, सोनू, अजय, रवि सहित कई छात्र छात्राएं मौजूद थे। इनकी उपस्थिति ने प्रदर्शनी को एक अकादमिक मंच भी प्रदान किया, जहां वे अपने ज्ञान और अनुभवों को साझा कर सके।