सैन्य सम्मान से भिंड के लाल का किया अंतिम संस्कार

Nov 15 2025

ग्वालियर। राष्ट्र सेवा के प्रति समर्पण और साहस का प्रतीक बने भिंड जिले के जसवंतपुरा गांव के बीर सपूत नायक विक्रम सिंह परिहार अब की बार जब अपने पैतृक गांव पहुंचे तो मगर तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर के रूप में। लेह-लद्दाख की दुर्गम ऊंचाइयों पर कठोर मौसम में ड्यूटी निभाते हुए हृदयगति रुक जाने से वे वीरगति को प्राप्त हो गए। उनकी शहादत की खबर से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है। वहीं गर्व की अनुभूति भी कि गांव ने देश को ऐसा बहादुर लाल दिया।
नायक विक्रम सिंह भारतीय सेना की सप्लाई कोर में तैनात थे। लेह-लद्दाख जैसी उच्च पर्वतीय और कठिन परिस्थितियों में वे महीनों से ड्यूटी कर रहे थे। सेना अधिकारियों के अनुसार वहां का तापमान अक्सर शून्य से कई डिग्री नीचे चला जाता है और ऑक्सीजन की कमी भी जवानों के लिए चुनौती होती है। ऐसे ही माहौल में देश की रक्षा और आपूर्ति व्यवस्था बनाए रखने में विक्रम सिंह का योगदान अमूल्य रहा।
गांव में उमड़ पड़ा जनसैलाब
जब उनका पार्थिव शरीर जसवंतपुरा पहुंचा तो सारा गांव गमगीन हो गया। ग्रामीण, सामाजिक संगठनों के सदस्य और दूर-दराज के लोग अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े। सडक़ से लेकर घर तक भारत माता की जय, विक्रम सिंह अमर रहें और जब तक सूरज-चांद रहेगा, विक्रम तेरा नाम रहेगा के नारे गूंजते रहे। नम आंखों और भारी मन से लोगों ने अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई दी।
सेना ने दिया गार्ड ऑफ ऑनर
सेना के जवानों द्वारा नायक विक्रम सिंह को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। सैन्य परंपराओं के अनुरूप सलामी के बाद उनका अंतिम संस्कार पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया गया। परिवारजन, रिश्तेदार और स्थानीय लोग भावुक हो उठे जब सैनिकों ने तिरंगा सम्मानपूर्वक परिवार को सौंपा। विक्रम सिंह अपने पीछे दो पुत्रों को छोड़ गए हैं। उनके परिव्र पर यह दुखद आघात असहनीय था, लेकिन बेटे की शहादत पर परिजनों ने गर्व भी जताया।
 नायक विक्रम सिंह ऐसे परिवार से आते हैं जहां देश सेवा की परंपरा गहराई से रची-बसी है। उनके भाई सूबेदार मदन सिंह भी भारतीय सेना में पदस्थ हैं। गांव और परिवार के लोग बताते हैं कि बचपन से ही विक्रम सिंह में अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और देशभक्ति की भावना कूट-कूटकर भरी थी।