कथा आत्मा को गर्वित और चरित्र को निर्मल कर देती है:सतीश महाराज

Nov 14 2025

ग्वालियर। महावीर भवन कंपू पर चल रही भागवत कथा के छठे दिन भागवताचार्य सतीश महाराज ने कहा कि भगवान की कथा मन को पवित्र आत्मा को गर्वित और चरित्र को निर्मल कर देती है। जैसे-जैसे हम भगवान की कथा को सुनते चले जाते हैं वैसे-वैसे वह हमारे मन की सफाई करती चली जाती है कथा मन को प्रसन्न करती है और चित्त को शांत करती है। 
महाराज श्री ने कहा भागवत कथा विवेक को जागृत कर देती है नियमित कथा का श्रवण एवं मनन करने वाला व्यक्ति गलत काम कर ही नहीं सकता है। उन्होंने कहा हमें सदा ऐसा आचरण करना चाहिए कि हमारे व्यवहार और वाणी से किसी को दुख न पहुंचे उन्होंने कहा कि भगवान ने जब रास किया तो जितनी गोंपियां थी भगवान उतने ही स्वरुप में प्रकट हो गए। व्यास पीठ से सतीश महाराज ने कहा भक्त वत्सल भगवान भक्तों के उद्धार के लिए अवतार लेते हैं और अपनी लीला रचाते हैं हमें परमात्मा के सिमरन को कभी नहीं भूलना चाहिए। 
उन्होंने कंस वध की लीला बताते हुए कहा की मथुरा के राजा कंस द्वारा अक्रूर को भगवान कृष्ण और बलराम को मथुरा लाने के लिए भेजा अक्रूर जब नंद बाबा के यहां पहुंचे, तो गोपी ग्वालो सखियों ने रास्ता रोक लिया सब बृजवासी रूदन करने लगे। भगवान ने उन्हें सांत्वना दी और मथुरा के लिए रवाना हुए। मथुरा में प्रवेश करते ही कुब्जा से भेंट हुई तथा अत्याचारी कंस का वधकर महाराज उग्रसेन को मथुरा का राजा बना दिया।
महाराज  ने कृष्ण रुक्मणी विवाह का प्रसंग सुनाते हुए कहा की रुक्मणी मन ही मन भगवान कृष्ण को अपना पति स्वीकार कर चुकी थी, लेकिन रुक्मणी को भगवान तक पहुंचना दुर्लभ था रुक्मणी ने देखा कि हमारे पिता और भाई शिशुपाल से शादी करने के लिए तैयार हो रहे हैं, तो उन्होंने एक पंडित के माध्यम से भगवान कृष्ण को पत्र भेजा और अंत में लिख दिया यदि आप नहीं आए तो हम अपने प्राण त्याग दूंगी। भगवान कृष्ण रुक्मणी  के पास पहुंचे और रुक्मणी जैसे ही गौरी पूजन को आती है वैसे ही भगवान उनका हरण कर ले जाते हैं और फिर धूमधाम से द्वारका में उनका विवाह होता है।
 कथा समापन पर परीक्षित सुमन प्रेम नारायण रूबी रजत डॉ प्रशिल डॉक्टर रिचा श्रीमती पुष्पा श्रीमती लक्ष्मी श्रीमती मालती गोपाल दास गोयल उनके परिवार एवं आदि सभी भक्तगणों ने कृष्ण रुक्मणी की आरती उतारी आरती के उपरांत प्रसादी वितरण किया गया।