वासना को उपासना में बदल देती है कथा:इंद्रदेव महाराज
Nov 14 2025
ग्वालियर। भगवान की कथा का प्रभाव ऐसा है कि वासना से युक्त इंसान भी भगवान की उपासना करने लगता है। यह विचार महामंडलेश्वर इंद्रदेव सरस्वती महाराज ने इंटक मैदान हजीरा पर आयोजित हो रही श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिवस शुक्रवार को गोवर्धन पूजा के दौरान व्यक्त किए। इस अवसर पर धूमेश्वर धाम के महंत अनिरुद्ध वन महाराज. चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष प्रवीण अग्रवाल.कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुनील शर्मा सहित अनेक संत महंत और श्रद्धालु मौजूद रहे।
इंद्रदेव महाराज ने कहा कि हमें अपना आहार शुद्ध रखना चाहिए। उदर के साथ आंख कान का आहार बिगड़ गया तो विचार भी बिगड़ जाएगा और विचार बिगड़ गया तो फिर भगवान के नाम में मन नहीं लगेगा। आहार शुद्धि से विचार शुद्धि और विचार शुद्धि से भगवत भजन में मन रमता है। सत्कर्म की जड़ पाताल तक होती है। जो अपने बच्चों को भी साधु सेवा के संस्कार सिखा देते हैं तो उन्हें उसका सुफल जरूर मिलता है। बच्चों का जन्मदिन गौशाला में मनाए। इस मौके पर घर में भजन कीर्तन करवाएं. जिसमें दादी नानी को सम्मिलित करें। यदि भूल से उन्हें वृद्ध आश्रम भेज दिया है तो उन्हें घर वापस ले आओ. क्योंकि बुजुर्गों की सेवा में ही भगवान की सेवा होती है।
उन्होंने बताया कि वेदों में अर्थ को धन नहीं कहा गया बल्कि गोधन पुत्र धन और अन्नधन को अहम बताया गया है। जीभ की लार को औषधि बताते हुए उन्होंने कहा कि लार को तंबाकू खाकर मत थूकों। लार का सूख जाना बीमारी का संकेत है। लार सूख जाने पर भोजन करने का मन नहीं होता। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए कोल्ड ड्रिंक की जगह नींबू पानी पियो इससे बाल गाल आंख सब अच्छे होंगे। सब कुछ पैसे से मिल सकता है लेकिन शरीर पैसों से नहीं मिलेगा बड़े भाग्य से यह मनुष्य शरीर मिला है इसे व्यर्थ में नष्ट न करें। अपनी जीवन शैली को ठीक करें जल्दी सोए और जल्दी उठे।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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