भगवान कृष्ण ने उठाया गोवर्धन पर्वत, लगे 56 भोग

Nov 13 2025

ग्वालियर। महावीर भवन में चल चल रही श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन भागवत आचार्य सतीश महाराज ने कहा कि जब वृंदावन वासियों ने भगवान कृष्ण के कहने पर इंद्र की पूजा करना बंद कर दिया तो इंद्र ने लगातार बारिश की वृंदावन वासियों ने बारिश से बचाने के लिए भगवान ने गोवर्धन पर्वत को अपनी एक उंगली पर उठा लिया।
महाराज श्री ने भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं का विस्तृत वर्णन करते हुए बताया श्री कृष्ण का जन्म मथुरा के कारागार में हुआ था लेकिन कंस से बचाने के लिए उन्हें वासुदेव ने गोकुल में यशोदा और नंद के पास पहुंचा दिया जहां उन्होंने बालपन बिताया। भगवान श्रीकृष्णा बचपन से ही नटखट थे जो गोपियों का दही और माखन चुराते थे। इसलिए उनका एक नाम माखन चोर भी पड़ा।
महाराज श्री ने कहा गोवर्धन पूजा दीपावली के अगले दिन कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की पड़वा को मनाई जाती है जिसमें भगवान कृष्ण गोवर्धन पर्वत और गायों की पूजा होती है। आज की कथा में छप्पन भोग के साथ आकर्षक झांकी भी लगाई गई। कथा के अंत में परीक्षित सुमन प्रेम नारायण रूबी रजत श्रीमती पुष्पा श्रीमती लक्ष्मी श्रीमती मालती गोपाल दास गोयल एवं उनके परिवार तथा सभी भक्तों ने गोवर्धन की आरती उतारी तथा भागवत महापुराण की आरती के पश्चात अन्नकूट प्रसादी वितरण किया गया।