संतान संस्कारी चाहते हो तो बिना नहाए रसोई में ना घुसे: इंद्रदेव महाराज
Nov 13 2025
ग्वालियर। यदि आप चाहती हो कि आपके बच्चे आज्ञाकारी और संस्कारी हो तो आपको स्वयं को भी अपना आचरण सुधारना होगा। जो माताएं बिना नहाए रसोई में प्रवेश करती हैं उनकी संतान राक्षसी प्रवृत्ति की हो जाती है और आपकी करतूत आपके बच्चों को भुगतनी पड़ती है। इंटक मैदान में आयोजित हो रही श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिवस गुरुवार को यह विचार महामंडलेश्वर इंद्रदेव महाराज ने व्यक्त किए। इस मौके पर भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाया गया जिसमें खूब बधाइयां लुटाई गई और माताओं ने गोविंद गोपाल आयो... भजन पर जमकर नृत्य किया। इस मौके पर ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर, नगर निगम में पूर्व नेता प्रतिपक्ष कृष्ण राव दीक्षित मौजूद रहे।
इंद्रदेव महाराज ने कहा कि भोजन पद्धति ठीक ना होने से बच्चों का आचरण खराब हो रहा है। रसोई में प्रवेश करें और बच्चों को सात्विक आहार परोसें। जिस घर में रोज अज्ञारी होती है उसे घर को एकादशी का फल प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि मां-बाप के आचरण का बच्चों पर पूरा असर होता है। जिन बच्चों के माता-पिता का आचरण सही नहीं होता है. उनकी औलाद कभी अच्छी नहीं बन सकती। गर्भ में जो माताएं गुरु मंत्र का जप करती हैं उनकी संतान सदाचारी होती है। होलिका की कथा सुनाते हुए उन्होंने कहा कि जिनके मन में दूसरे के बालक को नुकसान पहुंचाने का भाव पैदा हो गया वह खुद ही नष्ट हो जाती हैं।
श्री कृष्ण जन्मोत्सव की कथा सुनाते हुए उन्होंने कहा कि जिन्हें भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव की कथा सुनने का अवसर मिलता है उनके बच्चे कभी बीमार नहीं होते इस कथा को सुनने से बांझ माता की भी गोद भर जाती है लेकिन हम यूरिया डालकर धरती माता को बांझ करने में लगे हुए हैं । यदि हम गौ पालन करें और अपने खेत में गाय के गोबर की खाद दें तो धरती फिर से खिल उठेगी और उसमें यूरिया डालने की जरूरत नहीं होगी।
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