जिसके मित्र स्वयं द्वारकाधीश हैं वह निर्धन कैसे हो सकता है-वेदांत जी महाराज

Nov 11 2025

ग्वालियर अचलेश्वर महादेव मंदिर पर चल रही श्रीमद् भागवत कथा के सातवें और अंतिम दिन प्रसिद्ध भागवताचार्य वेदांत जी महाराज ने कहा की सातवें दिन की भागवत कथा सुनने से पूरे सप्ताह की कथा का फल प्राप्त होता है यह कथा जीवन को पवित्र और सन्मार्ग पर चलने में सहायक होती है जिन लोगों के जीवन में भागवत कथा या धर्म का समावेश नहीं होता उनके जीवन में कोई ना कोई विध्न अवश्य आता है उन्होंने सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कहा सुदामा निर्धन नहीं थे उनके पास भौतिक संसाधन भले ही ना हो लेकिन संतोष धन था जिसके पास संतोष धन होता है वही धनी होता है सुदामा चरित्र का बखान करते हुए उन्होंने कहा कि जिनकी मित्रता की मिसाल आज भी दी जाती है आप सोचो कृष्ण सुदामा की मित्रता कितनी महान रही होगी आज हम मित्रता का भाव नहीं समझ रहे हैं व्यक्ति ऐसे अनेक उदाहरण हैं की मित्रता के लिए लोगों ने अपने प्राणों को न्यौछावर कर दिए लोग कहते हैं कि सुदामा यदि निर्धन थे तो फिर धनवान कौन है जिसके मित्र स्वयं द्वारकाधीश हैं वह निर्धन कैसे हो सकता है आज लोगों के पास धन तो है फिर भी भगवान का भजन नहीं कर पा रहे हैं उन्होंने कहा की कथा भागवत में भले ही भंडारा ना करो लेकिन गौ माता के लिए गौ चारे की व्यवस्था जरूर करनी चाहिए उन्होंने कहा जीवन में यदि धन आ जाए तो अच्छे काम में जरूर सहयोग करना चाहिए व्यास पीठ से महाराज श्री ने कहा सच्चा मित्र वही है जो आपकी हालत न देखकर आपके दिल और मन को समझे भगवान श्री कृष्ण ने सुदामा की हालत देखकर सब कुछ समझ लिया और बड़ी सूझबूझ से उन्होंने जो मुट्ठी चूउड़े फंकी मार कर सुदामा की गरीबी को मिटा दिया यही नहीं उनके चरण भी अपने आसुओं से धोएं सुदामा चरित्र में मित्रता का महत्व बताता है परीक्षित घनश्याम सेन अचलेश्वर भक्त मंडल गिर्राज मंदिर भक्त मंडल आदि सभी भक्तगणों ने भागवत महापुराण की आरती उतारी आरती के उपरांत प्रसादी वितरण किया गया